divya shakti maa poonam ji
गीता’ भी समझना मुश्किल हो तो आज धर्म को मेरे द्वारा दिये ज्ञान, मेरी वाणी में ही जानो. सबसे सीधा और सरल रास्ता है धर्म का : भगवान

अध्याय – १९ सम्बन्धों का अर्थ है, सत्य, प्रेम, विश्वास व त्याग की नींव पर बनी दीवारों को पकड़े, धर्म की छत से (१९ अक्टूबर, १९९४) मनुष्यों में सम्बन्ध इसलिये बनाये गये थे कि जिसके द्वारा मनुष्य अपनी मर्यादा में रह सके. यह भी सत्य है कि जो संबंध, जिन्हें तुम्हारे संसार में सम्बन्ध कहा जाता है, वे मेरे बनाये नहीं हैं. मगर इनको जिन्होंने भी आरम्भ में बनाया वे थे आरम्भ में जिन्होंने धरती पर मनुष्यों को किस तरह रहना चाहिये, किस धर्म का पालन करना चाहिये, समाज याRead More
जब मैं रोग देता हूँ, तब उस रोग की कोई दवा नहीं होती : भगवान

मेरे रूपों की गणना कोई भी नहीं कर सकता है। अध्याय – १४ : तुम्हारी वाणी में मेरा वास है (१४ अक्टूबर, १९९४) तुम्हारे जीवन के हर पग पर, अपने साथ, अपनी शक्ति, संबल और जीवन की हर बाधा को समाप्त करके सुखी, शान्त और यशस्वी दृढ़ जीवन का ही आशीर्वाद देता हूँ। जीवन में कहीं भी, एक भी लिया हुआ तुम्हारा निर्णय, कभी अधूरा या अपूर्ण और व्यर्थ नहीं होगा। तुम्हारी वाणी में तो मेरा ही वास है तुम्हारी वाणी में तो मेरा ही वास है, फिर किसी भीRead More
मैं तो तुम्हारे मन पर दृष्टि रखे हूँ : भगवान की वाणी

आत्म-निरीक्षण और सुरक्षा का मार्ग मैं तो तुम्हारे मन पर दृष्टि रखे हूँ : समय पर दृष्टि बनाए रखो, सब कुछ स्वयं दिखाई दे जायेगा। मगर स्वयं पर भी दृष्टि रखो कि किस तरह तुम मेरे लिये क्या करते हो? क्योंकि मैं तो तुम्हारे मन पर दृष्टि रखे हूँ। जो करोगे वह तुम्हारे लिये ही हित में होगा; क्योंकि यही तो वह स्थान होगा जहाँ अनेकों सुरक्षा पायेंगे। पानी की स्थितियाँ जो दिन-प्रतिदिन प्यास लेकर आयेंगी इनके लिए भी तो तुम्हें स्थान बनाना ही होगा। सत्य तो स्वयं ही देखोगेRead More
अंधविश्वास नहीं विवेक ही सच्ची भक्ति है | Spiritual Guidance for Life

संघर्षों पर विजय – अध्याय – 12 Spiritual Guidance for Life : अंधविश्वास नहीं विवेक ही सच्ची भक्ति है सतर्क रहना है समझदार रहना है, यह भी एक भक्ति है आँखें मूंद कर नहीं रहना है। भक्ति करने का अर्थ यह भी नहीं है कि हम बिल्कुल ही नादान बन जाये, यह हम समझते हैं। कोई भी आकर आपको कुछ भी समझा जाये या कुछ भी बन जाये, कहीं न कहीं जब आपमें विवेक है, तभी आप भगवान के भक्त हैं तो हमें सतर्क रहना है समझदार रहना है, यहRead More
