Main Menu

editorial

 
 

संपादकीय | विरोध को रोकने की रणनीति या लोकतंत्र की परीक्षा?

Editor Tej Prakaash

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) को लेकर प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शनों ने केवल राजनीतिक विवाद ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और राज्य की भूमिका पर भी गंभीर बहस छेड़ दी है। जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले राजधानी में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई। कई इलाकों में निषेधात्मक आदेश लागू किए गए, बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए तथा यातायात और सार्वजनिक परिवहन पर भी व्यापक प्रतिबंध लगाए गए। तथ्य क्या हैं? यह तथ्य है कि सुरक्षा कारणोंRead More


व्यवस्था पर सवाल: कानून की कमियों की जीत और प्रशासनिक नैतिकता की हार

कानून की कमियों की जीत और प्रशासनिक नैतिकता की हार : लोकतंत्र की नींव दो मुख्य स्तंभों पर टिकी होती है—एक निष्पक्ष न्याय व्यवस्था और दूसरा पारदर्शी प्रशासन। लेकिन जब गंभीर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपी नौकरशाह कानून की तकनीकी कमियों, लचर जांच प्रणाली या साक्ष्यों के अभाव का लाभ उठाकर फिर से अपने पदों पर बहाल हो जाते हैं, तो यह पूरे प्रशासनिक ढांचे और जन-विश्वास पर एक गहरा आघात होता है। सवाल यह उठना लाजिमी है कि क्या किसी अधिकारी का कानूनी दांव-पेंचों के सहारे छूट जानाRead More


विकास के दर्पण में गायब आम आदमी: क्यों दरक रही जीवन की बुनियादी बुनियाद?

jivan ki buniyad

आज जीवन की बुनियाद क्यों दरक रही: विकास के दावों के बीच पिसता आम आदमी | Hotlink News जानिए कैसे भव्य परियोजनाओं और बजटीय दावों के बावजूद धरातल पर बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं, जिससे जनता में निराशा और आक्रोश बढ़ रहा है। ​चमक-धमक के पीछे छिपी जमीनी हकीकत ​अखबार के संपादकीय लेख “आज जीवन की बुनियाद क्यों दरक रही” के अनुसार, विकास का अर्थ केवल ऊंची इमारतें, एक्सप्रेसवे और जगमगाती रोशनी नहीं है। आज सरकारें बड़े बजट की घोषणाएं कर रही हैं, लेकिन धरातल पर आम आदमी के लिए शुद्धRead More


सुरक्षा बनाम अभिव्यक्ति: संवैधानिक संतुलन ही लोकतंत्र की असली ताकत

संपादकीय (Editorial) संपादक/स्तंभकार: तेज प्रकाश बंद कमरे में टिप्पणी करना आसान, सुरक्षा हटा दी तो भीगी बिल्ली बनने में देर नहीं लगेगी: Yogi Adityanath, CM, UP उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हाल ही में पुलिस सुधारों और कानून-व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण पर दिया गया बयान प्रशासनिक प्राथमिकताओं और संवैधानिक अधिकारों के बीच की लकीर को रेखांकित करता है। मुख्यमंत्री ने सुरक्षित माहौल को समृद्धि की पहली शर्त बताया और कहा कि ‘आपकी सुरक्षा, हमारा संकल्प’ राज्य का ध्येय वाक्य है। इसी क्रम में उन्होंने टिप्पणी की कि सुरक्षा केRead More