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संपादकीय

 
 

संपादकीय: संवैधानिक संस्थाएँ, जन-भरोसा और पूर्व जजों का पत्र

Editor Tej Prakaash

जन-भरोसा और पूर्व जजों का पत्र : 42 पूर्व न्यायाधीशों द्वारा चुनाव आयोग (ECI) पर विपक्ष के हमलों को लेकर लिखा गया खुला पत्र एक बार फिर देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख और उनकी भूमिका पर एक गंभीर बहस को जन्म देता है। पत्र में पूर्व जजों ने चेतावनी दी है कि बिना पुख्ता सबूतों के चुनाव आयोग और न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्थाओं को लगातार कटघरे में खड़ा करने से लोकतंत्र में जनता का विश्वास कमजोर हो सकता है। निश्चित रूप से, लोकतांत्रिक व्यवस्था में निष्पक्ष और स्वतंत्र संस्थाएँRead More


सुरक्षा बनाम अभिव्यक्ति: संवैधानिक संतुलन ही लोकतंत्र की असली ताकत

संपादकीय (Editorial) संपादक/स्तंभकार: तेज प्रकाश बंद कमरे में टिप्पणी करना आसान, सुरक्षा हटा दी तो भीगी बिल्ली बनने में देर नहीं लगेगी: Yogi Adityanath, CM, UP उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हाल ही में पुलिस सुधारों और कानून-व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण पर दिया गया बयान प्रशासनिक प्राथमिकताओं और संवैधानिक अधिकारों के बीच की लकीर को रेखांकित करता है। मुख्यमंत्री ने सुरक्षित माहौल को समृद्धि की पहली शर्त बताया और कहा कि ‘आपकी सुरक्षा, हमारा संकल्प’ राज्य का ध्येय वाक्य है। इसी क्रम में उन्होंने टिप्पणी की कि सुरक्षा केRead More