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सत्य

 
 

प्रहलाद जी का अडिग संकल्प जिसने जीवन सार्थक कर दिया

असीम सत्य और ईश्वर का एक रूप सत्य जो असीम है जिसको हम सीमित नहीं कर सकते। सत्य को हम अपने शब्दों में परिभाषित नहीं कर सकते। सत्य वह तेज है, वह चीज है, जो आप जानते हैं आपको सौभाग्य प्राप्त हुआ है, “श्रीकृष्णचेतनावतार देवी माँ” के माध्यम से भगवत कृपा के तीव्र अवतरण को देखने का। आज से कुछ माह पूर्व जब हमने ‘त्रिशूल-रूप’ दर्शन किए, पिछले वर्ष के वार्षिकोत्सव में, वो भगवान का संकेत है कि चाहे ‘त्रिशूल-रूप’ हो या ‘ॐ’ रूप हो, किसी भी शारीरिक रूप से,Read More


सत्य, अहिंसा और युवा: गांधी जयंती पर आत्ममंथन

क्या महात्मा गांधी आज भी प्रासंगिक हैं, या हम केवल उनकी तस्वीर पर माला चढ़ाकर उनके विचारों को भूल चुके हैं? 2 अक्टूबर हमारे लिए केवल महात्मा गांधी की जयंती मनाने की तारीख नहीं है। यह दिन हमें अपने समाज, लोकतंत्र और स्वयं के आचरण को आईने में देखने का अवसर देता है। मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में हुआ था। आगे चलकर यही व्यक्ति सत्याग्रह और अहिंसा को राजनीतिक संघर्ष की प्रभावशाली पद्धति के रूप में दुनिया के सामने लेकर आया। गांधी की विरासतRead More