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योगिराज अभिनव जी

 
 

अंधविश्वास नहीं विवेक ही सच्ची भक्ति है | Spiritual Guidance for Life

संघर्षों पर विजय – अध्याय – 12 Spiritual Guidance for Life : अंधविश्वास नहीं विवेक ही सच्ची भक्ति है सतर्क रहना है समझदार रहना है, यह भी एक भक्ति है आँखें मूंद कर नहीं रहना है। भक्ति करने का अर्थ यह भी नहीं है कि हम बिल्कुल ही नादान बन जाये, यह हम समझते हैं। कोई भी आकर आपको कुछ भी समझा जाये या कुछ भी बन जाये, कहीं न कहीं जब आपमें विवेक है, तभी आप भगवान के भक्त हैं तो हमें सतर्क रहना है समझदार रहना है, यहRead More


प्रहलाद जी का अडिग संकल्प जिसने जीवन सार्थक कर दिया

असीम सत्य और ईश्वर का एक रूप सत्य जो असीम है जिसको हम सीमित नहीं कर सकते। सत्य को हम अपने शब्दों में परिभाषित नहीं कर सकते। सत्य वह तेज है, वह चीज है, जो आप जानते हैं आपको सौभाग्य प्राप्त हुआ है, “श्रीकृष्णचेतनावतार देवी माँ” के माध्यम से भगवत कृपा के तीव्र अवतरण को देखने का। आज से कुछ माह पूर्व जब हमने ‘त्रिशूल-रूप’ दर्शन किए, पिछले वर्ष के वार्षिकोत्सव में, वो भगवान का संकेत है कि चाहे ‘त्रिशूल-रूप’ हो या ‘ॐ’ रूप हो, किसी भी शारीरिक रूप से,Read More