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संपादकीय | विरोध को रोकने की रणनीति या लोकतंत्र की परीक्षा?

Editor Tej Prakaash

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) को लेकर प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शनों ने केवल राजनीतिक विवाद ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और राज्य की भूमिका पर भी गंभीर बहस छेड़ दी है। जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले राजधानी में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई। कई इलाकों में निषेधात्मक आदेश लागू किए गए, बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए तथा यातायात और सार्वजनिक परिवहन पर भी व्यापक प्रतिबंध लगाए गए। तथ्य क्या हैं? यह तथ्य है कि सुरक्षा कारणोंRead More


विकास के दर्पण में गायब आम आदमी: क्यों दरक रही जीवन की बुनियादी बुनियाद?

jivan ki buniyad

आज जीवन की बुनियाद क्यों दरक रही: विकास के दावों के बीच पिसता आम आदमी | Hotlink News जानिए कैसे भव्य परियोजनाओं और बजटीय दावों के बावजूद धरातल पर बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं, जिससे जनता में निराशा और आक्रोश बढ़ रहा है। ​चमक-धमक के पीछे छिपी जमीनी हकीकत ​अखबार के संपादकीय लेख “आज जीवन की बुनियाद क्यों दरक रही” के अनुसार, विकास का अर्थ केवल ऊंची इमारतें, एक्सप्रेसवे और जगमगाती रोशनी नहीं है। आज सरकारें बड़े बजट की घोषणाएं कर रही हैं, लेकिन धरातल पर आम आदमी के लिए शुद्धRead More