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diya shakti yogiraj abhinav ji

 
 

दया धर्म का मूल है! दया करो कृपा पाओगे!

योगिराज अभिनव जी द्वारा रचित भगवान की वाणी के संकलन संघर्षों पर विजय के पृष्ठ संख्या 30 -41 से साभार लिया गया. प्राप्ति स्थान सिद्ध शक्तिपीठ सत्य मंदिर बी 116/2 इंदिरा नगर लखनऊ बंटवारे से कोई भी चीज़ छोटी ही होगी, अगर आप संसारी चीज़ों को बाँटेंगे घर बाँटेंगे, अपने परिवार को बाँटेंगे कुछ भी आप विभाजन करेंगे तो वह कम ही होगा।  सिर्फ जो असीम है वह कम नहीं हो सकता वह भगवान की कृपा है, वह धर्म है, मानवता है, आपकी दयालु भावना है। आपके निःस्वार्थ कर्म हैं,Read More