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दया धर्म का मूल है! दया करो कृपा पाओगे!

योगिराज अभिनव जी द्वारा रचित भगवान की वाणी के संकलन संघर्षों पर विजय के पृष्ठ संख्या 30 -41 से साभार लिया गया. प्राप्ति स्थान सिद्ध शक्तिपीठ सत्य मंदिर बी 116/2 इंदिरा नगर लखनऊ

बंटवारे से कोई भी चीज़ छोटी ही होगी, अगर आप संसारी चीज़ों को बाँटेंगे घर बाँटेंगे, अपने परिवार को बाँटेंगे कुछ भी आप विभाजन करेंगे तो वह कम ही होगा। 

  • दया धर्म का मूल है! दया करो कृपा पाओगे!
    योगिराज अभिनव जी द्वारा रचित भगवान की वाणी के संकलन संघर्षों पर विजय के पृष्ठ संख्या 30 -41 से साभार लिया गया. प्राप्ति स्थान सिद्ध शक्तिपीठ सत्य मंदिर बी 116/2 इंदिरा नगर लखनऊ बंटवारे से कोई भी चीज़ छोटी ही होगी, अगर आप संसारी चीज़ों को बाँटेंगे घर बाँटेंगे, अपने परिवार को बाँटेंगे कुछ भी आप विभाजन करेंगे तो वह कम ही होगा।  सिर्फ जो असीम है वह कम नहीं हो सकता वह भगवान की कृपा है, वह धर्म है, मानवता है, आपकी दयालु भावना है। आपके निःस्वार्थ कर्म हैं,Read More
  • मैं सत्य रूप में ही मनुष्य को सब कुछ देने के लिये तत्पर भी रहता हूँ : भगवान
    दिव्य ज्योति पृष्ठ संख्या 78 से 80 तक साभार अवतरित स्वयं में क्या है, जैसा है, क्या उसे होना चाहिये? अपने ही मूल्यांकन का दृष्टि-कोण, स्वयं उसके अपने मूल्यों को, किस तरह घटाता हुआ सिद्ध कर देता है, कि उसका अपना मूल्य जिस तरह जिस रूप में वह आज तक समझता रहा, वैसा उसमें कुछ भी नहीं है। समय रहते क्या होने जा रहा है, यह तो मैं बताता भी जा रहा हूँ; और यह भी बता रहा हूँ कि किस तरह, कहाँ पर अपनी अपूर्णता को दूर करके, स्वयंRead More
  • भयंकर रूप से, चारों ओर से आने वाली विपत्तियों का समय है
    भगवान की वाणी के दिव्य ज्योति वाणी खंड के अध्याय 20 पृष्ठ 176 से 179 से साभार लिया गया है!प्राप्ति स्थान : सिद्ध शक्तिपीठ सत्य मंदिर, बी 116/2 इंदिरा नगर लखनऊ १८ मई १९९४ नास्तिक को भी मेरी पहचान की बुद्धि आ जायेगी। पशु-वध का खुला रूप कम होगा। चारों ओर से आने वाली विपत्तियों का समय है : संसार में हर ओर भयंकर रूप से चारों ओर से विपत्तियां आने वाली हैं। यह भी सत्य है इनका कारण तो, मात्र मेरा क्रोध ही है। यह सब जो कहोगे किRead More
  • सूरह अल-असर का संदेश: ईमान, नेक अमल, हक़ और सब्र—कामयाबी की चार बुनियादें
    आध्यात्मिक मार्गदर्शन | Tej Prakaash कामयाबी की चार बुनियादें : इस्लाम में इंसान की सफलता केवल दुनियावी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उसके ईमान, चरित्र और अल्लाह की राह पर चलने से मापी जाती है। कुरआन की सबसे छोटी लेकिन अत्यंत गहन सूरतों में से एक सूरह अल-असर (सूरह 103) मानव जीवन के लिए ऐसा मार्गदर्शन प्रस्तुत करती है, जिसे अनेक इस्लामी विद्वान सफलता का संक्षिप्त संविधान मानते हैं। सूरह अल-असर (Surah Al-Asr) कुरआन की 103वीं सूरह है। यह बहुत छोटी लेकिन बेहद गहरी शिक्षाओं वाली सूरह है। इसमें अल्लाह नेRead More
  • भाग 3 : नवरात्रि एवं ध्वनि, कृषि, समाज और संस्कृति — परंपरा और विज्ञान के बीच संतुलित दृष्टिकोण
    विशेष रिपोर्ट | Hotlink News क्या शंख और घंटी की ध्वनि का कोई वैज्ञानिक आधार है? परंपरा और विज्ञान के बीच संतुलित दृष्टिकोण : नवरात्रि के दौरान मंदिरों और घरों में शंख, घंटी और मंत्रोच्चार का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता है कि इनकी ध्वनि वातावरण को पवित्र बनाती है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है। आधुनिक विज्ञान इस विषय को अलग दृष्टि से देखता है। ध्वनि चिकित्सा (Sound Therapy) और ध्यान (Meditation) पर हुए कई अध्ययनों से संकेत मिलता है कि नियमित मंत्र-जप, गहरी श्वास और लयबद्धRead More

सिर्फ जो असीम है वह कम नहीं हो सकता वह भगवान की कृपा है, वह धर्म है, मानवता है, आपकी दयालु भावना है। आपके निःस्वार्थ कर्म हैं, जितने निःस्वार्थ कर्म एक करेगा बढ़ेगा, दो करेगा और बढ़ेगा, तीन करेगा और बढ़ेगा, लेकिन अगर वही आप बाँटेंगे तो कम होगा।

जमीन के बँटवारे से (क्या) किसी का फायदा हुआ है? जमीन के बँटवारे से आपको हो सकता है, दो लाख या एक करोड़ कुछ पैसा मिल जाए, लेकिन परिवार तो टूट गया आपका और वही जमीन अगर साथ रहती किसी एक परिवार में एकजुटता के साथ रहती पूरा परिवार एक साथ रहता, तो परिवार की प्रगति होती परिवार आगे बढ़ता, वह तो खो गया। 

कुछ लाख रुपये आज आपको जरूर मिल जायेंगे, तो मत बाँटिए, संजो के रखिए समेट कर रखिए, जो है आपके साथ। 

भगवान की कृपा को अगर बाँटना है तो भगवान की कृपा को जरूर साझा कर सकते हैं। भगवान का जो आशीर्वाद है, भगवान ने हमें जो दिशा दी है, भगवान ने जो हमें उपदेश दिया है वह साझा करिए, वह सहायता करिए, वह आगे पहुँचाइए। 

अगर एक को मिला तो दो को बता दो, चार को बता दो। जो ज्ञान है अगर आपको एक आकार ढूँढते हुए देखना है तो एक शरीर के रूप में देखें, एक शरीर पूर्ण, दो हाथों, दो नेत्रों, एक नाक, दो कान, दो पैरों से ही होता है। 

उस एक शरीर से जो आपका इतना सा शरीर है, उसमें से अगर आप हाथ, पैर काटते हैं, निकाल देते हैं तो क्या वह जीवन, क्या वह शरीर पूर्ण रह जाएगा? शरीर तभी पूर्ण होता है जब उसमें सब कुछ हो, अगर सब कुछ नहीं है हो सकता है आपको अपने जीवन में ऐसे लोग मिलें जिनके पास सब कुछ न हो, घर आप उनको वह सब कुछ दें जो उनके पास नहीं है। 

अगर उनके पास खाने को नहीं है तो यह आपका धर्म है कि आप उनको दें।

अगर आप भक्त हैं, भगवान आपके पास बड़ी गाड़ी भी भेज सकते हैं, लेकिन जिसके पास हो सकता है पैर न हों और अगर आपने उसकी सहायता कर दी तो बड़ी गाड़ी तो हो सकता है आपको सिनेमा ले जाए या पड़ोस में नाम कर दे, लेकिन जब उस एक आदमी को जो चल नहीं सकता या उसे कोई और कठिनाई है, उसका अगर आप निवारण कर देते हैं तो आप भगवान की कृपा पात्र बन जाते हैं। 

भगवान की कृपा तो आपको मिलती ही है, लेकिन जब उस इंसान के मन से आपके लिए जो प्रार्थना निकलती है, उससे बड़ी गाड़ी तो क्या और भी क्या-क्या मिल जाएगा, आपको खुद नहीं मालूम चलेगा।

मंदिर से जब आप निकलें तो अगर कोई श्वान मिले, कुछ भी मिले, किसी भी आकार में भगवान का रूप मिले, अगर आप उसको पहचान लें तो वह जो कृपा आपको मिलेगी, कहीं स्वार्थ दिखाने वाली नहीं होगी, उसका स्वार्थ नहीं होता है, वह बस मिल जाती है। 

कई बार हम पहचान नहीं पाते, शायद आपने कभी किसी श्वान को भोजन दिया हो, किसी ठिठुरते हुए को कंबल दे दिया हो, उसकी कृपा कब कहाँ आपको बचा लेती है समझ में नहीं आता।

एक्सीडेंट होते-होते बच गया, कोई अस्पताल में भर्ती था वह वापस ठीक हो गया लोग समझ नहीं पाते हैं। लोग बोलते हैं ठीक हो गया और जाकर कहीं दूध या प्रसाद चढ़ा देंगे। भगवान को आपके प्रसाद, दूध या भोजन की आवश्यकता नहीं है, भगवान को किसी चीज़ की आवश्यकता नहीं है बल्कि पूरे संसार को भगवान की आवश्यकता है तो भगवान के लिए करने वाले हम लोग कौन होते हैं लेकिन भगवान ने हमें जो दिया है वह जीवन ज्ञान और अपना दर्शन उसको हम जरूर पहचाने और अपने जीवन में आगे बढ़ाएं।

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