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जब मैं रोग देता हूँ, तब उस रोग की कोई दवा नहीं होती : भगवान

sadhna

मेरे रूपों की गणना कोई भी नहीं कर सकता है। अध्याय – १४ : तुम्हारी वाणी में मेरा वास है (१४ अक्टूबर, १९९४) तुम्हारे जीवन के हर पग पर, अपने साथ, अपनी शक्ति, संबल और जीवन की हर बाधा को समाप्त करके सुखी, शान्त और यशस्वी दृढ़ जीवन का ही आशीर्वाद देता हूँ। जीवन में कहीं भी, एक भी लिया हुआ तुम्हारा निर्णय, कभी अधूरा या अपूर्ण और व्यर्थ नहीं होगा। तुम्हारी वाणी में तो मेरा ही वास है तुम्हारी वाणी में तो मेरा ही वास है, फिर किसी भीRead More