Main Menu

Spiritual Wisdom

 
 

सत्य का सागर है यह मेरी वाणी : भगवान

satya ka sagar hai meri ye vani

(११ दिसंबर, १९९४)सत्य का सागर है यह मेरी वाणी, जहाँ जो भी इसके जल का पान करेगा, वह निश्चित रूप से ही शक्ति भी पायेगा, शान्ति भी। किंतु यह जल उस तरह का है, जिसका रस पीने की आकांक्षा और लोभ ही जिसका होगा, वही इसे पीना भी चाहेगा, क्योंकि यह जल ही ऐसा है, जो जिस भाव से पियेगा, उस पर उसी रूप में यह प्रभाव डालने वाला भी होगा। क्योंकि मनुष्य का शरीर, जैसा मैं तुम्हें बताता ही रहा हूँ कि इसमें जब तक सत्य नहीं होगा, जलRead More