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Maya and Moksha

 
 

संबंधों के नाम पर अपनी चिता कब तक जलाते रहोगे?

sambandho ke naam par kab tak apni chita jalate rahoge

अध्याय – २५ : संबंधों के नाम पर अपनी चिता कब तक जलाते रहोगे? २३ मई १९९४ सत्य मनुष्य की शक्ति भी है, शान्ति भी। यह मनुष्य का अपना ही अविश्वास और असत्य से जुड़ा मन होता है, जिसके कारण वह जीवन भर अशक्त भी रहता है, अशान्त भी। हरेक, जो भी भक्ति करता है वह अपनी भक्ति का आधार जिसे भी बनाता है अथवा उस आधार पर ही, अपने आपको उसका भक्त भी कहता है, मगर यदि पूछा जाये कि उसकी भक्ति का कारण क्या है, (तो) वह यहRead More