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मोहनदास से महात्मा तक

 
 

मोहनदास से महात्मा तक: गांधी के बदलते पते

Reborn Manish की फेसबुक वाल से प्रेरित 1869 से 1874 के बीच अगर आप मोहन को पत्र लिखते, तो लिफ़ाफ़े पर पता होता— दीवान हरजीवन रायदास की हवेली, भाटिया बाज़ार, पोरबंदर स्टेट, काठियावाड़ एजेंसी। पिता राजकोट शिफ्ट हुए, तो मोहन की शुरुआती शिक्षा भी वहीं हुई। अब चिट्ठी का नया ठिकाना था— काबा गांधी नो डेलो, राजकोट (सौराष्ट्र)। फरवरी 1887 में भावनगर के शामलदास कॉलेज में दाखिला लिया, पर मन न लगा। 10 अगस्त 1888 को मुंबई से इंग्लैंड के लिए रवाना हुए—लक्ष्य था बैरिस्टरी। 19 सितंबर 1888 को ब्रिटेनRead More