Main Menu

जीवन

 
 

मन के गहरे विश्वास के साथ मेरा हाथ पकड़ो, जीवन का सहारा पा जाओगे।

दिव्य ज्योति भाग 2 पृष्ठ संख्या 235 से 242 तक से उद्धृत  अध्याय-२६  मन के गहरे विश्वास के साथ मेरा हाथ पकड़ो, जीवन का सहारा पा जाओगे। २३ मई १९९४ जीवन को सही अर्थों में जीने के लिये मन के गहरे विश्वास की आवश्यकता होती है, जो जीवन का सहारा बन सके। उस सहारे को हर क्षण पा भी सकते हो, मगर सहारा छोड़ कर नहीं, उसे पकड़ कर ही पा सकते हो। स्थितियों में परिवर्तन होता ही है, जब तक मनुष्य मेरा हाथ नहीं पकड़ता, और जब पकड़ता है,Read More