Main Menu

आत्मिक विकास

 
 

दैवी चेतना का उदय और असत्य की पराजय

satya-ki-maryada-aur-asuri-shaktiyon-ka-ant

दैवी चेतना का उदय और असत्य की पराजय : दिव्य ज्योति नामक भगवान की वाणी के खंड के पृष्ठ संख्या 159 से 164 तक से साभार लिया गया….. सत्य की मर्यादा यह नहीं होती कि चाहे कोई सत्य का अपमान कर दे। सत्य की मर्यादा यह नहीं होती, कि जो भी चाहे सत्य का अपमान कर सकता है। सत्य तुम्हारा मान भी है, तुम्हारा जीवन भी तुम्हारे जीवन का आधार भी, तुम्हारा अपना कर्त्तव्य भी। फिर जिस सत्य को, भौतिक जीवन में भी बाँधा है, उस सत्य को भौतिक संसारRead More