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अंधविश्वास नहीं विवेक ही सच्ची भक्ति है | Spiritual Guidance for Life

संघर्षों पर विजय – अध्याय – 12

Spiritual Guidance for Life : अंधविश्वास नहीं विवेक ही सच्ची भक्ति है

सतर्क रहना है समझदार रहना है, यह भी एक भक्ति है आँखें मूंद कर नहीं रहना है।

भक्ति करने का अर्थ यह भी नहीं है कि हम बिल्कुल ही नादान बन जाये, यह हम समझते हैं। कोई भी आकर आपको कुछ भी समझा जाये या कुछ भी बन जाये, कहीं न कहीं जब आपमें विवेक है, तभी आप भगवान के भक्त हैं तो हमें सतर्क रहना है समझदार रहना है, यह भी एक भक्ति है आँखें मूंद कर नहीं रहना है।

मन केंद्रित करना है तो शून्य पर केंद्रित मत करिये। भगवान के कर्मों पर भगवान के ज्ञान पर केंद्रित करिये

भगवान ने अभी आपको क्या बोला कि आपको अगर मन केंद्रित करना है तो शून्य पर केंद्रित मत करिये। भगवान के कर्मों पर भगवान के ज्ञान पर केंद्रित करिये अगर आप शून्य पर केंद्रित करने की कोशिश करेंगे तो कहीं न कहीं आपके मन में भी शून्य ही रहेगा और आपको शून्य नहीं बनना है।

आप शून्य नहीं हैं, तो अपने आपको कभी भी शून्य नहीं बनाना है और न शून्य में अपना मन केंद्रित करना है

आप संपूर्ण हैं आपकी भक्ति संपूर्ण है, आपकी भक्ति आपको संपूर्ण बनाती है आप शून्य नहीं हैं, तो अपने आपको कभी भी शून्य नहीं बनाना है और न शून्य में अपना मन केंद्रित करना है, भगवान की ही ओर अपना मन केंद्रित करना है, इसी विश्वास के साथ ‘सत्य-मंदिर’ आते रहना है और मंदिर से जुड़े रहना है, आप सबको। बस यही है कि पूरा जीवन ही हमारा एक अनुभव बन जाता है।

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भगवान हमसे जो कर्म चाहें वह हम कर पायें

भगवान ने बहुत कुछ सिखाया है और सिखाते रहे हैं, हम बस सीखते रहें यही हमारी एक प्रार्थना है, भगवान हमसे जो कर्म चाहें वह हम कर पायें। जो भी परिस्थिति आई हम समझते हैं वह हर संपूर्ण वाणी परिवार के लिए है, जैसा भगवान ने अभी बताया कि यह संपूर्ण वाणी परिवार है और पूरी मानवता के लिए, मानव जाति के लिए है कि जो भी परिस्थितियाँ आयें, वह अनुकूल हों या प्रतिकूल, जो भी दुख आए, दर्द आए, सुख आए, प्रसन्नता आए, खुशी आए या जीवन में काँटे आयें या फूल आयें, हम कभी भी भगवान के दिखायें पथ से न हटें कभी भी हम भटकें नहीं।

हम कभी भी भगवान के दिखायें पथ से न हटें कभी भी हम भटकें नहीं।

यह बहुत ही महत्वपूर्ण बात है कि आगे जो भी चुनौतियाँ आयें, हमें अपनी भक्ति नहीं छोड़नी। ‘शक्ति माँ’ जी ने हमें बताया है कि जब आपकी भक्ति आपसे छूट जाती है, जब आपका विश्वास आपसे छूट जाता है, तभी आप अनाथ होते हैं। संसार में आपके पास कुछ रहे न रहे, लेकिन आपकी भक्ति आपके पास है तो वही आपकी शक्ति बन जाती है। आपकी भक्ति ही आपकी शक्ति है और वही निर्धारित करती है कि आपके साथ क्या होगा, तो कभी भी विश्वास नहीं छोड़ना क्योंकि अगर विश्वास छूटा, भक्ति छूटी, तब आप सांसारिक और आध्यात्मिक दोनों रूपों से अवश्य अनाथ हो जायेंगे।

आप में से किसी के भी दुख अकेले उसके नहीं हैं।

कभी भी अपने आपको अकेला और अनाथ नहीं समझना है, इसीलिए वाणी परिवार हम सबके साथ में है, जिसकी जो भी स्थिति आती है, हम सब मिलकर डटकर उसका सामना करते हैं, यही हमारी शक्ति है, यही हमारी एकता है। एकता ही हमारी शक्ति है कि आप में से किसी के भी दुख अकेले उसके नहीं हैं। भगवान तो देख ही रहे हैं लेकिन पूरा संपूर्ण वाणी परिवार आपके साथ है। आप देखते हैं कि समय आने पर वाणी परिवार ही साथ आता है चाहे वह रक्त संबंध के रूप में न हो, लेकिन वाणी परिवार ही आज के समाज में हमारा सत्य के रूप में एक परिवार है।






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