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सत्य सदा सत्य ही होता है, जो सत्य ही स्वीकार करता है

divyajyoti bhag7

भगवान की वाणी — मूल पाठ (Transcription)

अध्याय-३१२ : सत्य का महत्व.

२७ अगस्त १९९८

“सत्य सदा सत्य ही होता है, जो सत्य ही स्वीकार करता है, असत्य को स्वीकार भी नहीं करता है ।

सत्य का भक्त जब सत्य की मर्यादा से बँधा जीवन जीता है, तब असत्य का कोई भी स्थान अथवा महत्व उसके जीवन में नहीं होता है ।

मेरी भक्ति और पूजा करने के पहिले, स्वयं ही समझो कि क्या ‘सत्य का महत्व’, आज भी समझे हो ?

जब तुम्हारी आसक्ति, आज भी असत्य से बँधी हुई है, तब मेरी भक्ति करते हुए भी, क्या तुम्हें मुझसे प्रीति हो पाई है ?

सत्य का यह अद्भुत रूप, जो आज संसार में प्रत्यक्ष है, इसकी शक्ति और महिमा, शीघ्र ही सभी की बुद्धि भी, समझ भी पायेगी ।”

भक्ति और सत्य की मर्यादा — भगवान की वाणी का दिव्य संदेश

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आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले प्रत्येक साधक के लिए ‘सत्य’ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी मर्यादा है। अध्याय ३१२ ‘सत्य का महत्व’ में स्पष्ट किया गया है कि सत्य का मूल स्वभाव कभी नहीं बदलता।
जैसा कि वाणी में उल्लेख है:

“सत्य सदा सत्य ही होता है, जो सत्य ही स्वीकार करता है, असत्य को स्वीकार भी नहीं करता है ।”

जब एक साधक या भक्त सत्य के पथ को अपनाता है, तो उसका जीवन असत्य के हर प्रकार के प्रभाव से मुक्त हो जाता है।

“सत्य का भक्त जब सत्य की मर्यादा से बँधा जीवन जीता है, तब असत्य का कोई भी स्थान अथवा महत्व उसके जीवन में नहीं होता है ।”

सच्ची भक्ति की पहली शर्त: क्या आपने समझा है सत्य का महत्व?

अक्सर मनुष्य बाह्य पूजा-पाठ और कर्मकांडों में लगा रहता है, किंतु उसका मन सांसारिक मोह-माया और असत्य में अटका रहता है। ईश्वर भक्ति की शुरुआत ही तब होती है जब साधक अपने भीतर झांककर यह देखे कि वह सत्य के प्रति कितना निष्ठावान है।

भगवान की वाणी में गंभीर प्रश्न उठाते हुए सचेत किया गया है:

“मेरी भक्ति और पूजा करने के पहिले, स्वयं ही समझो कि क्या ‘सत्य का महत्व’, आज भी समझे हो ?”

“जब तुम्हारी आसक्ति, आज भी असत्य से बँधी हुई है, तब मेरी भक्ति करते हुए भी, क्या तुम्हें मुझसे प्रीति हो पाई है ?”

यदि जीवन में असत्य के प्रति आसक्ति बनी हुई है, तो ईश्वर से सच्चा प्रेम या प्रीति संभव ही नहीं है।

सत्य की शक्ति और महिमा का प्रकाश

सत्य का स्वरूप अत्यंत अलौकिक और प्रभावकारी है। यद्यपि आज के समय में मनुष्य का मन असत्य के द्वंद्वों से भ्रमित हो सकता है, परंतु सत्य की सामर्थ्य को अधिक समय तक अनदेखा नहीं किया जा सकता।

“सत्य का यह अद्भुत रूप, जो आज संसार में प्रत्यक्ष है, इसकी शक्ति और महिमा, शीघ्र ही सभी की बुद्धि भी, समझ भी पायेगी ।”


यदि आप इस दिव्य वाणी और अध्यात्म से जुड़े प्रेरक प्रवचनों का आनंद लेना चाहते हैं, तो सिद्ध शक्तिपीठ सत्य मंदिर में प्रत्येक रविवार को भक्ति और ईश्वर के आदेशों को सुनने के लिए सपरिवार इष्ट मित्रों के संग पधारें ।


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