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श्रीकृष्ण चेतनवतार देवी माँ कुसुम जी

 
 

अवतार संपूर्ण दैवी-भाव ही नहीं, दैवी-शक्ति का संपूर्ण रूप होता है!

दैवी और आसुरी वृत्तियों के विषय में भगवान के शब्द अब बताता हूँ तुम्हें वह, जो मैं कल से तुम्हारे विषय में अर्थात् प्राणी-मात्र के विषय में बता रहा हूँ, तुम्हारे अन्दर की दैवी और आसुरी वृत्तियों के विषय में। दैवी भावनाओं के विषय में तुम्हें बताया ही है कि आज के संसार में संपूर्ण दैवी-भाव-संपन्न तो तुम मनुष्यों के बीच मिलना ही असंभव है। मात्र मेरा भक्त, जो मेरे द्वारा ही स्वीकृत हो पाता है; या फिर जिसे मैंने अपने भक्त के रूप में, एक भक्त के रूप में,Read More


सत्य सदा सत्य ही होता है, जो सत्य ही स्वीकार करता है

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भगवान की वाणी — मूल पाठ (Transcription) अध्याय-३१२ : सत्य का महत्व. २७ अगस्त १९९८ “सत्य सदा सत्य ही होता है, जो सत्य ही स्वीकार करता है, असत्य को स्वीकार भी नहीं करता है । सत्य का भक्त जब सत्य की मर्यादा से बँधा जीवन जीता है, तब असत्य का कोई भी स्थान अथवा महत्व उसके जीवन में नहीं होता है । मेरी भक्ति और पूजा करने के पहिले, स्वयं ही समझो कि क्या ‘सत्य का महत्व’, आज भी समझे हो ? जब तुम्हारी आसक्ति, आज भी असत्य से बँधीRead More