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दिव्य शक्तियों का अवतरण

 
 

अवतार संपूर्ण दैवी-भाव ही नहीं, दैवी-शक्ति का संपूर्ण रूप होता है!

दैवी और आसुरी वृत्तियों के विषय में भगवान के शब्द अब बताता हूँ तुम्हें वह, जो मैं कल से तुम्हारे विषय में अर्थात् प्राणी-मात्र के विषय में बता रहा हूँ, तुम्हारे अन्दर की दैवी और आसुरी वृत्तियों के विषय में। दैवी भावनाओं के विषय में तुम्हें बताया ही है कि आज के संसार में संपूर्ण दैवी-भाव-संपन्न तो तुम मनुष्यों के बीच मिलना ही असंभव है। मात्र मेरा भक्त, जो मेरे द्वारा ही स्वीकृत हो पाता है; या फिर जिसे मैंने अपने भक्त के रूप में, एक भक्त के रूप में,Read More