मिलावट करके बेचने वाला अपराधी हो जाता है!

संकलन : साभार दिव्य ज्योति (भाग 7) / भगवान की वाणी
Tej Prakaash, Editor in chief, Hotlink News
प्राप्ति स्थान : सिद्ध शक्ति पीठ सत्य मंदिर, बी 116/2, इंदिरा नगर, लखनऊ
संदेश : प्रत्येक रविवार, शाम 5 बजे से 8 बजे तक – दिव्य आध्यात्मिक सत्संग
आध्यात्मिक गुरु शक्ति माँ पूनम जी एवं
दिव्य शक्ति योगिराज अभिनव जी के पावन सान्निध्य में
मिलावट करके बेचने वाला अपराधी हो जाता है! : ….दूध जो पानी मिला कर बेचा जाता है, वह भी व्यापार होता है, दान नहीं होता; बल्कि मिलावट करके बेचने के कारण, अपराधी का (कर्म) हो जाता है।
धर्म और सत्य का रूप भी, आज इस संसार में, तुम मनुष्यों ने, ऐसा ही बना डाला है। कभी उस धर्म में पानी मिलाकर बेच रहे हो, व्यापार कर रहे हो। जब वह, जो जिस रूप में, संसार में होता रहता है, तब धर्म और सत्य के लिये जिया हुआ जीवन नहीं होता, बल्कि धोखा-धड़ी करने के कारण धर्म के व्यापारी का होता है; और आज धर्म के व्यापारियों की कमी नहीं है, भरे पड़े हैं चारों ओर।
यूँ भी दूध तुम्हारा नहीं, दूध उस पशु का ही होता है, जिसे बेचकर धन्धा करते हो। फिर भी [पृष्ठ ७८] उस पशु के प्रति तुम्हारा भाव बड़ा ही प्रदूषित होता है; और जिस क्षण जब भी वह पशु दूध देना बन्द कर देता है, तुम्हें उसे रोटी देना या भरपेट अन्न देना भी भारी पड़ जाता है।
आज तुम्हारे संसार में उन असमर्थ पशुओं के भी व्यापारियों की कमी नहीं है। जब तुम्हें लगा कि दूध से अधिक लाभ तो इन पशुओं को बेच देने से है अथवा उनका चमड़ा और हड्डी बेचने से है, तब तुम दूध निकालने, इन्हें खाना खिलाने का भी कष्ट क्यों उठाओ? वैसा ही रास्ता अपनाने लगते हो जिससे धन भी आ जाये और कष्ट तुम्हें न हो, भले ही कितने जीवन बेच डालो।
उन पर क्या बीती, उन्हें कैसा लगा, यह सोचने की भी आवश्यकता नहीं।
तो ऐसे धर्म के व्यापारी या कह सकते हो पशुओं के व्यापारी, जब भी एक साथ कहीं इकट्ठे [पृष्ठ ७९] होंगे, उन पर भारी विपत्ति आ कर, उनकी यह नर-लीला समाप्त करते हुये अनेकों रावणों का एक साथ वध कर देगी।
धर्म को धर्म ही रहने दो, तभी धर्म के प्रति तुम्हारे भावों में पवित्रता आयेगी।
धर्म में अधर्म की मिलावट हो जाती है जब मनुष्य धर्म का पालन अथवा सत्य की भक्ति करता तो है, स्वार्थ के लिये, मगर उन क्षणों में प्रदर्शन करता है परम भक्त का। स्वार्थ सिद्ध होते ही केवल पाखंडी भक्त बना रहता है।
अब बताता हूँ वह जो मैं तुम्हें सत्य पर आधारित जीवन के जीने की बात बता रहा था। जीवन के सारे संघर्ष और समस्यायें भी आती हैं, जब मनुष्य का विश्वास अपनी शक्ति पर होता है।
जब भक्त सत्य का होता है तब उससे असत्य की शक्तियाँ स्वयं भी इतनी भयभीत रहती हैं, कि वे स्वयं ही रास्ता छोड़ती जाती हैं।
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