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सेहत का खेल या नसों का ब्लॉक? कुकिंग ऑयल्स की असली रैंकिंग

कुकिंग ऑयल्स की असली रैंकिंग : आपकी रसोई में रखी तेल की बोतल आपकी सेहत का फैसला हर रोज करती है। कई बार जिस तेल को हम ‘हार्ट-हेल्दी’ समझकर बाजार से लाते हैं, वही शरीर के अंदर बीमारियों का जाल बुन रहा होता है।

​प्रसिद्ध स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार, भारतीय कुकिंग स्टाइल के हिसाब से सभी कुकिंग ऑयल्स एक जैसे नहीं होते। आइए जानते हैं 10 से 0 के पैमाने पर आपके रसोई घर के तेलों की पूरी सच और सही इस्तेमाल की जानकारी।

​वनस्पति घी (Vanaspati Ghee)

  • ​अड़वांस ट्रुथ: यह केवल नाम का घी है। वास्तव में यह वेजिटेबल ऑयल को केमिकल प्रोसेस करके ठोस बनाया जाता है।
  • ​सेहत पर असर: इसमें खतरनाक ट्रांस फैट होते हैं जो गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) को कम करते हैं और बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को बढ़ाकर धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा पैदा करते हैं।
  • ​सावधानी: आप भले ही इसे घर में न लाएं, लेकिन बाहर मिलने वाले समोसे, नमकीन, बिस्किट और सस्ती मिठाइयों में इसका भारी इस्तेमाल होता है।

​रिफाइंड सोयाबीन तेल (Refined Soybean Oil)

  • ​अड़वांस ट्रुथ: भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाला और सबसे ज्यादा प्रोसेस किया जाने वाला तेल।
  • ​सेहत पर असर: बीजों से तेल निकालने के लिए हेक्सेन (Hexane) नामक पेट्रोलियम केमिकल का प्रयोग होता है। इसकी बदबू हटाने के लिए कृत्रिम खुशबू मिलाई जाती है। इसमें अत्यधिक ओमेगा-6 होता है जो शरीर में अंदरूनी सूजन (Inflammation) को बढ़ाता है।

​ऑलिव ऑयल / जैतून का तेल (Olive Oil)

  • ​अड़वांस ट्रुथ: यह इटैलियन कुकिंग के लिए तो ठीक है, लेकिन भारतीय रसोई के लिए बिल्कुल नहीं।
  • ​सेहत पर असर: इसके एंटीऑक्सीडेंट्स भारतीय कुकिंग की तेज आंच पर जलकर नष्ट हो जाते हैं। बाजार में मिलने वाला अधिकांश ऑलिव ऑयल ‘रिफाइंड’ होता है जिसका कोई खास लाभ नहीं है।
  • ​सही इस्तेमाल: इसे कभी भी छौंकने या तलने के लिए इस्तेमाल न करें; केवल सलाद के ऊपर कच्चा डालकर खाएं।

​राइस ब्रान ऑयल (Rice Bran Oil)

  • ​अड़वांस ट्रुथ: इसमें ओरिजानॉल (Oryzanol) नामक तत्व होता है जो कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद कर सकता है।
  • ​विशेषता: चावल की भूसी को बिना रिफाइन किए प्रोसेस नहीं किया जा सकता, लेकिन रिफाइंड तेलों की कैटेगरी में यह सबसे कम नुकसानदायक विकल्प माना जाता है।

​सफेद मक्खन (White Butter)

  • ​अड़वांस ट्रुथ: इसमें पानी और दूध के ठोस कण मौजूद होते हैं।
  • ​सही इस्तेमाल: कम तापमान पर ही जलने के कारण इसे कढ़ाई में पकाने के बजाय गरम रोटी, परांठे या सब्जी के ऊपर डालकर खाना फायदेमंद है।

​देशी घी – तलने व छौंकने के लिए (Ghee for Frying)

  • ​अड़वांस ट्रुथ: इसका स्मोक पॉइंट काफी हाई होता है, जिससे यह तलने के लिए सुरक्षित विकल्प बनता है।
  • ​कमी: तलते समय भोजन बहुत ज्यादा घी सोखता है, जिससे शरीर में सैचुरेटेड फैट की मात्रा बढ़ती है। बहुत तेज गरम करने पर इसका कोलेस्ट्रॉल ऑक्सीडाइज होकर नसों को नुकसान पहुंचा सकता है।

​नारियल का तेल (Virgin Coconut Oil)

  • ​अड़वांस ट्रुथ: सैचुरेटेड फैट अधिक होने के कारण तेज आंच पर भी इसके गुण नष्ट नहीं होते।
  • ​किसे इस्तेमाल करना चाहिए: दक्षिण भारतीय व्यंजनों, गरम मौसम, या गरम तासीर वाले लोगों के लिए यह नंबर-1 विकल्प है।​3. सरसों का तेल – काची घानी / कोल्ड प्रेस्ड (Mustard Oil)
  • ​अड़वांस ट्रुथ: उत्तर और पूर्वी भारत की पारंपरिक कुकिंग के लिए यह सबसे बेहतरीन और किफायती तेल माना जाता है।
  • ​विशेषता: इसमें सही अनुपात में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड्स होते हैं। इसका स्मोक पॉइंट बहुत हाई होता है, जिससे यह तेज आंच वाली भारतीय कुकिंग (छौंक और तलने) के लिए बिल्कुल सुरक्षित है।

​ध्यान दें: हमेशा कोल्ड प्रेस्ड या कच्ची घानी सरसों तेल का ही इस्तेमाल करें, रिफाइंड सरसों तेल से बचें।

एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल – केवल कच्चे इस्तेमाल के लिए (Extra Virgin Olive Oil)

​अड़वांस ट्रुथ: यह दुनिया के सबसे सेहतमंद तेलों में से एक माना जाता है, लेकिन इसकी एक खास शर्त है।​विशेषता: इसमें प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स और ओमेगा-9 (ओलिक एसिड) पाया जाता है, जो दिल की सेहत, ब्लड प्रेशर और सूजन को कम करने में असरदार है।
​सही इस्तेमाल: इसे बिल्कुल भी गरम न करें। इसे सिर्फ सलाद पर ड्रेसिंग के रूप में, उबली हुई सब्जियों के ऊपर या सूप में ऊपर से डालकर खाएं।

​A2 देशी गाय का बिलोना घी (A2 Desi Cow Ghee)

​अड़वांस ट्रुथ: पारंपरिक आयुर्वेद के अनुसार भारतीय रसोई के लिए नंबर-1 सबसे सुरक्षित विकल्प।
​विशेषता: पारंपरिक बिलोना विधि (दही को मथकर) से बना A2 घी पचने में बहुत आसान होता है। इसमें ब्यूटिरिक एसिड (Butyric Acid) होता है जो आंतों (Gut Health) को स्वस्थ रखता है और पाचन को दुरुस्त करता है।
​सही इस्तेमाल: इसका स्मोक पॉइंट बहुत ज्यादा होता है, इसलिए यह तेज आंच पर भी जहरीले टॉक्सिन्स पैदा नहीं करता। इसे दाल-सब्जी में छौंक लगाने, रोटी पर लगाने या हल्की आंच पर पकाने के लिए सबसे बेस्ट माना गया है।






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