अरुणाचल प्रदेश में सियांग बांध विवाद: विरोध प्रदर्शन हिंसक क्यों हुआ?

जानिए सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट का पूरा मामला
Hotlink News | विशेष रिपोर्ट
अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (Siang Upper Multipurpose Project – SUMP) को लेकर लंबे समय से चल रहा विरोध 25 अक्टूबर 2026 को हिंसक रूप ले बैठा। पूर्वी सियांग जिले के पासीघाट में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव के बाद सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, NHPC कार्यालय में आग लगा दी गई और कई सार्वजनिक वाहनों में तोड़फोड़ की गई।
यह विवाद केवल एक बांध परियोजना का नहीं, बल्कि विकास, पर्यावरण, आदिवासी अधिकार और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन का भी है।
क्या हुआ पासीघाट में?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, विरोध प्रदर्शन के दौरान—
NHPC कार्यालय में आग लगा दी गई।
एक पुलिस थाने को नुकसान पहुंचाया गया।
दो विधायकों और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के आवासों में तोड़फोड़ एवं लूटपाट की गई।
40 से अधिक पुलिसकर्मी पथराव में घायल हुए।
कम से कम 9 पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचा।
एक प्रदर्शनकारी आंसू गैस के गोले से घायल हुआ।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन ने पासीघाट, मेबो और रुकसिन क्षेत्रों में सार्वजनिक सभाओं और जुलूसों पर प्रतिबंध लगा दिया।
क्या है सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP)?
सियांग नदी पर प्रस्तावित यह परियोजना लगभग 11,200 मेगावाट क्षमता की बहुउद्देश्यीय जलविद्युत परियोजना है।
इस परियोजना के संभावित उद्देश्य हैं—
बिजली उत्पादन
बाढ़ नियंत्रण
जल संसाधन प्रबंधन
रणनीतिक दृष्टि से सीमा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना
यह परियोजना भारत की सबसे बड़ी प्रस्तावित जलविद्युत योजनाओं में से एक मानी जाती है।
स्थानीय लोग विरोध क्यों कर रहे हैं?
विरोध करने वाले कई स्थानीय संगठनों और आदिवासी समुदायों की प्रमुख चिंताएँ हैं—
विस्थापन की आशंका
जंगल और जैव विविधता पर प्रभाव
पारंपरिक आजीविका पर असर
सांस्कृतिक एवं धार्मिक स्थलों की सुरक्षा
पर्यावरणीय जोखिम
हालांकि विभिन्न समूहों की मांगें अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन व्यापक रूप से पर्यावरण और स्थानीय अधिकार प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
पुलिस का क्या कहना है?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शांतिपूर्ण बंद समाप्त होने के बाद कुछ प्रदर्शनकारी समूहों ने सड़क जाम कर दी। अधिकारियों का कहना है कि समझाने के प्रयासों के बावजूद स्थिति बिगड़ती गई और बाद में पथराव शुरू हो गया।
पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का प्रयोग किया। पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग और फोटोग्राफी किए जाने की जानकारी भी अधिकारियों ने दी है।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू की प्रतिक्रिया
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने हिंसा पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने प्रदर्शनकारी संगठनों से बातचीत करने की इच्छा जताते हुए कहा कि सरकार संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहती है।
भारत के लिए यह परियोजना क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है?
विशेषज्ञों के अनुसार सियांग नदी ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ इस क्षेत्र का सामरिक महत्व भी है क्योंकि यह चीन सीमा के निकट स्थित है।
इसी कारण परियोजना को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा, जल प्रबंधन और ऊर्जा आवश्यकताओं की भी चर्चा होती रही है।
विवाद का दूसरा पक्ष
परियोजना समर्थकों का मानना है कि—
इससे पूर्वोत्तर में बिजली उत्पादन बढ़ेगा।
रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।
वहीं विरोध करने वाले समूहों का कहना है कि विकास के साथ स्थानीय समुदायों की सहमति, पर्यावरण संरक्षण और पुनर्वास को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंध लागू किए हैं। सरकार और प्रदर्शनकारी संगठनों के बीच संभावित वार्ता से स्थिति सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।
परियोजना का भविष्य अब काफी हद तक संवाद, पर्यावरणीय मूल्यांकन, स्थानीय सहमति और प्रशासनिक निर्णयों पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष
अरुणाचल प्रदेश का सियांग बांध विवाद केवल एक विकास परियोजना का प्रश्न नहीं है। यह ऐसा मुद्दा है जिसमें ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, आदिवासी अधिकार और कानून-व्यवस्था सभी जुड़े हुए हैं। हिंसा किसी भी पक्ष के हित में नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के संवेदनशील मामलों का स्थायी समाधान केवल पारदर्शी संवाद और तथ्य आधारित निर्णयों से ही संभव है।
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