यूपी में बनेगा एक्सप्रेसवे का महानेटवर्क: कैबिनेट ने 4 लिंक एक्सप्रेसवे को दी मंजूरी, बुंदेलखंड से पूर्वांचल तक सफर होगा आसान

यूपी में एक्सप्रेसवे नेटवर्क का होगा विस्तार, चार नए लिंक एक्सप्रेसवे को मिली मंजूरी
यूपी में बनेगा एक्सप्रेसवे का महानेटवर्क: कैबिनेट ने 4 लिंक एक्सप्रेसवे को दी मंजूरी, बुंदेलखंड से पूर्वांचल तक सफर होगा आसान
यूपी में एक्सप्रेसवे नेटवर्क का होगा विस्तार, चार नए लिंक एक्सप्रेसवे को मिली मंजूरी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के एक्सप्रेसवे नेटवर्क को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में चार नए लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को मंजूरी दे दी गई। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गंगा और यमुना एक्सप्रेसवे के बीच तेज और निर्बाध संपर्क स्थापित होगा।
कैबिनेट बैठक में कुल 22 प्रस्तावों को स्वीकृति मिली, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण निर्णय चार लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण से संबंधित रहा। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से औद्योगिक निवेश, पर्यटन, माल परिवहन और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।
कौन-कौन से लिंक एक्सप्रेसवे को मिली मंजूरी?
1. आगरा-लखनऊ से पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे
यह परियोजना लगभग 51 किलोमीटर लंबी होगी और इसकी अनुमानित लागत 4,776 करोड़ रुपये है।
यह छह लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा।
इसके बनने से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे सीधे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएगा। वर्तमान में पूर्वांचल से आने वाले भारी वाहनों को लखनऊ शहर से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे ट्रैफिक दबाव बढ़ता है। नई लिंक सड़क बनने के बाद भारी वाहन शहर के बाहर से ही निकल सकेंगे और राजधानी में जाम की समस्या कम होने की उम्मीद है।
2. फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे
करीब 91 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे की अनुमानित लागत 7,489 करोड़ रुपये रखी गई है।
यह इटावा के पास आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से शुरू होकर फर्रुखाबाद होते हुए हरदोई के निकट गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा।
सरकार का लक्ष्य इस परियोजना को लगभग डेढ़ वर्ष में पूरा करना है। इससे अवध क्षेत्र, मध्य उत्तर प्रदेश और पश्चिमी यूपी के बीच तेज संपर्क स्थापित होगा।
3. झांसी लिंक एक्सप्रेसवे
लगभग 115 किलोमीटर लंबे झांसी लिंक एक्सप्रेसवे की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुकी है।
यह परियोजना झांसी को सीधे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जोड़ेगी। इसके माध्यम से डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, झांसी किला और ओरछा जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। सरकार का मानना है कि इससे बुंदेलखंड क्षेत्र में उद्योगों और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
4. जेवर लिंक एक्सप्रेसवे
करीब 74 किलोमीटर लंबा जेवर लिंक एक्सप्रेसवे कई चरणों में विकसित किया जाएगा।
इस परियोजना का उद्देश्य नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) को सीधे यमुना एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ना है। एयरपोर्ट शुरू होने के बाद यह मार्ग यात्रियों और माल परिवहन दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
प्रदेश में बनेगा एक्सप्रेसवे का महानेटवर्क
चारों लिंक एक्सप्रेसवे बनने के बाद उत्तर प्रदेश में एक व्यापक हाई-स्पीड सड़क नेटवर्क तैयार होगा। इससे पूर्वांचल, बुंदेलखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के बीच यात्रा का समय घटेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और निवेश को बढ़ावा मिलेगा, जबकि कृषि उत्पादों के परिवहन में भी तेजी आएगी।
प्रदेश को मिलने वाले प्रमुख लाभ
- लखनऊ में भारी वाहनों का दबाव कम होगा।
- पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच सीधी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी बनेगी।
- बुंदेलखंड डिफेंस कॉरिडोर को नई गति मिलेगी।
- जेवर एयरपोर्ट तक तेज सड़क संपर्क उपलब्ध होगा।
- उद्योग, पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
- माल ढुलाई की लागत और यात्रा समय में कमी आने की संभावना है।
क्या बोले सरकार?
राज्य सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों को आधुनिक एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़कर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और निवेश के नए अवसर पैदा करना है। लिंक एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद प्रदेश में सड़क परिवहन व्यवस्था पहले से अधिक तेज और सुविधाजनक होने की उम्मीद है।
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