इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट: बुलंदशहर यूरिया खाद घोटाला और कालाबाजारी का पर्दाफाश

अदालत द्वारा आरोपियों (तस्कर मोहम्मद हारून, रामेंद्र सिंह उर्फ गुड्डू, यश राघव और हरेंद्र प्रताप) पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA / रासुका) को निरस्त कर उन्हें तुरंत रिहा करने के आदेश पर सवाल उठ रहे हैं, कि क्या इससे तस्करों को संजीवनी नहीं मिल जाएगी उनका मनोबल नहीं बढ़ेगा…
बुलंदशहर यूरिया खाद घोटाला, इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि किस प्रकार कागजी दावों के उलट मैदानी स्तर पर खाद माफिया सक्रिय हैं। गोदाम कर्मचारियों और तस्करों की मिलीभगत से किसानों के हक का अन्न का ईंधन चुराया जा रहा है। इस मामले की और गहरी परतें उघाड़ने के लिए आपूर्ति विभाग और एसआईटी स्तर पर व्यापक वित्तीय और प्रशासनिक ऑडिट की आवश्यकता है।
अदालत ने मामले के चार मुख्य आरोपियों (तस्कर मोहम्मद हारून, रामेंद्र सिंह उर्फ गुड्डू, यश राघव और हरेंद्र प्रताप) पर बुलंदशहर जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA / रासुका) को निरस्त कर दिया है और उन्हें तुरंत रिहा करने के आदेश दिए हैं।
1. घटना का विवरण और पृष्ठभूमि
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के अनूपशहर थाना क्षेत्र अंतर्गत गंगा पुल पुलिस चौकी के पास जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। मुखबिर की सटीक सूचना पर जिला कृषि अधिकारी रामकुमार यादव ने तस्करों का पीछा किया और इफको (IFFCO) यूरिया खाद से लदे तीन संदिग्ध ट्रकों को धर दबोचा।
2. जब्ती और वित्तीय आकलन
- पकड़ी गई खाद: तीनों ट्रकों से कुल 1575 कट्टे (बोरियां) इफको यूरिया खाद बरामद की गई, जिसमें प्रत्येक ट्रक में 525-525 बोरियां लदी थीं।
- बाजार मूल्य: पकड़े गए माल की कुल अनुमानित कीमत लगभग ₹13 लाख आंकी गई है।
- गंतव्य: शुरुआती जांच में सामने आया कि यह खाद बुलंदशहर के आधिकारिक गोदाम (पीसीएफ/इफको) से निकालकर अवैध रूप से संभल जिले की तरफ भेजी जा रही थी।
3. सिंडिकेट और रिश्वतखोरी के बड़े खुलासे
- मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी: इस अवैध तस्करी का संचालन करने वाले मुख्य तस्कर हारून सहित ट्रकों के चालकों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
- कर्मचारियों की संलिप्तता और रिश्वत: रिपोर्ट के अनुसार, इस काले कारोबार में स्थानीय गोदाम के कर्मचारियों की भी संलिप्तता सामने आई है। शुरुआती खुलासों में गोदाम के कर्मचारियों द्वारा ₹2 लाख ऑनलाइन और ₹5 लाख नकद रिश्वत लेने की बात भी सामने आ रही है, जो इस पूरे सिंडिकेट के भीतर तक फैले भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।
4. किसानों के अधिकारों पर कुठाराघात और प्रशासनिक विडंबना
अन्नदाता की मुसीबतें: एक ओर जहाँ देश और प्रदेश की सरकारें किसानों को समय पर खाद, बीज और उर्वरक उपलब्ध कराने के दावे करती हैं, वहीं दूसरी ओर कालाबाजारियों द्वारा सरकारी कोटे की यूरिया को खुर्द-बुर्द कर दिया जाता है। फसल के सीजन के दौरान किसानों को डीएपी और यूरिया के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है, जबकि तस्कर ट्रकों के जरिए गोदामों से ही माल पार करा देते हैं।
कानूनी पेच और हाईकोर्ट का रुख: इस मामले में पुलिस प्रशासन ने शुरुआत में सख्त कदम उठाते हुए आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका/NSA) जैसी कड़ी कार्रवाई की संस्तुति की थी। हालांकि, बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस बात पर कड़ी टिप्पणी की कि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी के लिए विशेष कानून (PBMSEC Act) मौजूद होने के कारण ऐसे मामलों में एक साल की नजरबंदी के लिए रासुका का उपयोग कानून का दुरुपयोग है, जिसके बाद कोर्ट ने आरोपियों की नजरबंदी रद्द कर दी।
बुलंदशहर यूरिया और उर्वरक घोटाले में अक्टूबर 2026 तक की सरकारी जांच रिपोर्ट और कानूनी कार्रवाई की ताजा स्थिति निम्नलिखित है:
1. विभागीय जांच में सामने आईं नई अनियमितताएं (19 अक्टूबर 2026)
PCF (प्रांतीय सहकारी संघ) के जिला प्रबंधक गौरव कुमार और मुख्यालय की रिपोर्ट के अनुसार जांच में निम्नलिखित बड़े खुलासे हुए हैं: [1]
- रिकॉर्ड में हेराफेरी: पीसीएफ के गोदामों में उर्वरक (खाद) की जितनी बोरियां कागजों और सरकारी लेखा अभिलेखों में दर्ज थीं, जमीनी स्तर (मौके) पर उतनी मौजूद नहीं मिलीं। वित्तीय अनियमितता को छिपाने के लिए अकाउंट्स के साथ गंभीर छेड़छाड़ की गई थी। [1]
- तीन अन्य गोदामों से खाद गायब: मुख्य रूप से ज्वारखेड़ा, सिकंदराबाद और गुलावठी के तीन बफर गोदामों से यूरिया, डीएपी (DAP) और एनपीके (NPK) के 693 कट्टे गायब मिले हैं, जिससे शासन को 39.91 लाख रुपये के अतिरिक्त गबन की रिपोर्ट भेजी गई है। [1, 2]
- गेहूं-धान खरीद में भी लापरवाही: जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं और धान की खरीद व उसकी सीएमआर (CMR) डिलीवरी में भी जिम्मेदार कर्मचारियों द्वारा भारी लापरवाही और गड़बड़ी बरती गई। [1]
2. जांच टीम का विस्तार (अक्टूबर 2026)
इस घोटाले की गहराई को देखते हुए पीसीएफ मुख्यालय ने अपनी पुरानी तीन सदस्यीय कमेटी को भंग कर 5 सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच टीम का गठन किया है। इस टीम में शामिल मुख्य अधिकारी पूरे रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं: [1]
- क्षेत्रीय प्रबंधक (PCF अलीगढ़ मंडल)
- विकास कुमार (सहायक प्रबंधक लेखा, PCF मुख्यालय)
- वीरेन्द्र कुमार (सहायक भंडारनायक, PCF मुख्यालय)
- समीर महाजन (लेखाकार, PCF मुख्यालय)
- मोहित निगम (लेखाकार, PCF मुख्यालय) [1]
3. कानूनी मोर्चे पर बड़ा बदलाव (13 अक्टूबर 2026)
सरकारी जांच और पुलिस कार्रवाई के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को बड़ा झटका दिया है। [1]
- अदालत ने मामले के चार मुख्य आरोपियों (तस्कर मोहम्मद हारून, रामेंद्र सिंह उर्फ गुड्डू, यश राघव और हरेंद्र प्रताप) पर बुलंदशहर जिला प्रशासन द्वारा लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA / रासुका) को निरस्त कर दिया है और उन्हें तुरंत रिहा करने के आदेश दिए हैं। [1, 2]
- अदालत ने दलील स्वीकार की कि खाद कालाबाजारी के लिए पहले से ही विशिष्ट (विशेष) कानून मौजूद हैं, इसलिए इस मामले में सीधे रासुका (NSA) लगाना कानूनी रूप से सही नहीं था। हालांकि, भ्रष्टाचार और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत इन पर नियमित अदालती कार्यवाही और विभागीय रिकवरी जारी रहेगी। [1]
बुलंदशहर में यूरिया खाद घोटाला! 1575 कट्टा के साथ 3 ट्रक पकड़े गए
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