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निर्वाचन आयोग बनाम विपक्ष: SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में 15 बिंदुओं का जवाब

क्या हैं आरोप और आयोग का पक्ष?

नई दिल्ली:
मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर चल रहे विवाद में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट में 15 बिंदुओं वाला काउंटर-अफिडेविट दाखिल कर विपक्ष और याचिकाकर्ताओं के आरोपों का विस्तृत जवाब दिया है। आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े सभी निर्णय कानून के अनुरूप और तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

विपक्षी दलों और कुछ याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि:

  • मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने कथित रूप से कुछ फैसले अकेले लिए।
  • SIR के दौरान फॉर्म-6 में बदलाव किए गए।
  • मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं।
  • ECINet और चुनावी डेटा प्रबंधन को लेकर पारदर्शिता की कमी रही।
  • आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया में 2023 के कानून का पालन नहीं हुआ।
  • निर्वाचन आयोग बनाम विपक्ष: SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में 15 बिंदुओं का जवाब
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निर्वाचन आयोग का 15 बिंदुओं में जवाब

आयोग ने अपने हलफनामे में मुख्य रूप से निम्न बातें कहीं:

  1. SIR से जुड़े सभी आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से पारित हुए।
  2. CEC द्वारा एकतरफा निर्णय लेने का आरोप गलत है।
  3. याचिका मुख्यतः एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित है।
  4. आयोग के रिकॉर्ड के बजाय मीडिया रिपोर्ट पर भरोसा किया गया।
  5. फाइलों पर अधिकारियों या आयुक्तों की टिप्पणियां केवल विचार-विमर्श का हिस्सा होती हैं।
  6. अंतिम निर्णय सामूहिक विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाता है।
  7. फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया।
  8. SIR के लिए प्रयुक्त घोषणा-पत्र (Declaration) फॉर्म-6 से अलग दस्तावेज है।
  9. फॉर्म-6 में संशोधन का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है।
  10. ऑनलाइन व्यवस्था में फॉर्म-6 और घोषणा-पत्र को अलग-अलग प्रदर्शित किया गया।
  11. BLO द्वारा जुटाए दस्तावेज ECINet पर अपलोड किए जाते हैं।
  12. केवल डेटा अपलोड होने से किसी मतदाता का नाम स्वतः नहीं जुड़ता या हटता।
  13. अंतिम निर्णय संबंधित Electoral Registration Officer (ERO) ही करता है।
  14. आयोग की कार्यप्रणाली पर लगाए गए आरोप निराधार बताए गए।
  15. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल काउंटर-अफिडेविट को भी तीनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी।

विपक्ष का पक्ष

विपक्ष का कहना है कि:

  • SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए।
  • आयोग के भीतर मतभेदों को नजरअंदाज किया गया।
  • ECINet, फॉर्म-6 और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रही।
  • मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया पर स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

आयोग का जवाब

आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि:

  • आंतरिक टिप्पणियां और अलग-अलग राय संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं।
  • अंतिम आदेश हमेशा सामूहिक रूप से पारित किए गए।
  • किसी भी पात्र मतदाता का नाम हटाने या जोड़ने का निर्णय केवल वैधानिक प्रक्रिया और सक्षम अधिकारी द्वारा लिया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट में आगे क्या?

मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। आयोग ने अपना आधिकारिक पक्ष हलफनामे के माध्यम से रख दिया है, जबकि याचिकाकर्ता आयोग की प्रक्रिया और निर्णयों को चुनौती दे रहे हैं। अंतिम निर्णय अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।

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ECI Counter Affidavit on SIR: निर्वाचन आयोग का सुप्रीम कोर्ट में 15 बिंदुओं का जवाब, विपक्ष के आरोपों पर क्या कहा?

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निर्वाचन आयोग ने SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में 15 बिंदुओं वाला काउंटर-अफिडेविट दाखिल कर विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। जानिए आयोग और विपक्ष के सभी प्रमुख तर्क।

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