यूपी में रजिस्ट्री के बाद स्वतः होगा संपत्ति का नामांतरण, 17 अंकों की यूनिक प्रॉपर्टी आईडी लागू करेगी योगी सरकार

लखनऊ
उत्तर प्रदेश सरकार संपत्ति की खरीद-बिक्री और नामांतरण प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत अब रजिस्ट्री होने के बाद संपत्ति का नामांतरण (दाखिल-खारिज) स्वतः किए जाने की तैयारी है। इससे नागरिकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने और लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से राहत मिलने की उम्मीद है।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की समीक्षा बैठक में इस व्यवस्था को लागू करने की दिशा में आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा की गई।
17 अंकों की यूनिक प्रॉपर्टी आईडी होगी जारी
सरकार शहरी क्षेत्रों की प्रत्येक संपत्ति को 17 अंकों की यूनिक प्रॉपर्टी आईडी प्रदान करेगी। ई-नगरसेवा पोर्टल पर पहले से दर्ज 56.57 लाख संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा चुका है और इन्हें नई आईडी से जोड़ा जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि के लिए खसरा आधारित पहचान व्यवस्था जारी रहेगी, जबकि आबादी क्षेत्र की संपत्तियों के लिए 13 अंकों की “घरौनी” आईडी का उपयोग किया जाएगा।
अर्बन प्रॉपर्टी कार्ड भी मिलेगा
चयनित नगर निकायों में यूनिक प्रॉपर्टी आईडी के साथ “अर्बन प्रॉपर्टी कार्ड” जारी करने की योजना बनाई गई है। इससे संपत्ति का स्वामित्व, रिकॉर्ड और सत्यापन डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगा।
इन 10 नगर निकायों में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
सरकार ने पहले चरण में 10 नगर निकायों का चयन किया है। इनमें गोरखपुर, झांसी, हरदोई, नवाबगंज (बाराबंकी) और चित्रकूटधाम सहित अन्य नगर निकाय शामिल हैं।
ई-नगरसेवा और नक्शा (NAKSHA) प्रणाली के डेटाबेस को API के माध्यम से जोड़ा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य 31 दिसंबर 2026 तक इन निकायों में परियोजना पूरी करना है।
संपत्ति विवादों पर लगेगी रोक
नई डिजिटल व्यवस्था से संपत्ति का रिकॉर्ड ऑनलाइन सत्यापित किया जा सकेगा। आवंटन पत्र, रजिस्ट्री, बैनामा और लीज डीड जैसे दस्तावेजों को पंजीकरण के प्रमुख आधार के रूप में मान्यता दी जाएगी।
यदि किसी संपत्ति में रिकॉर्ड संबंधी विसंगति या विवाद सामने आता है तो उसके समाधान के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की जाएगी। इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगाने और संपत्ति लेन-देन को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।
आम लोगों को क्या होगा फायदा?
- नामांतरण के लिए अलग आवेदन की आवश्यकता कम होगी।
- सरकारी कार्यालयों के चक्कर और समय की बचत।
- ऑनलाइन रिकॉर्ड सत्यापन की सुविधा।
- संपत्ति खरीद-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ेगी।
- फर्जी दस्तावेज और दोहरी बिक्री जैसी समस्याओं पर अंकुश लगेगा।
- डिजिटल प्रॉपर्टी रिकॉर्ड से भविष्य में बैंक लोन और अन्य सेवाओं में भी सुविधा मिलने की संभावना।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश सरकार की प्रस्तावित ऑटोमैटिक नामांतरण और यूनिक प्रॉपर्टी आईडी व्यवस्था राज्य में संपत्ति प्रबंधन को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। यदि योजना निर्धारित समय पर लागू होती है, तो लाखों संपत्ति मालिकों को नामांतरण प्रक्रिया में बड़ी राहत मिल सकती है।
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