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ध्रुव राठी का BBC इंटरव्यू: जंतर-मंतर प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और चुनाव आयोग पर उठे सवाल

पुलिस एक्शन और चुनाव आयोग पर बेबाक बातचीत

नई दिल्ली। ध्रुव राठी का BBC इंटरव्यू : चर्चित यूट्यूबर और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर ध्रुव राठी ने बीबीसी न्यूज़ हिंदी को दिए एक विस्तृत इंटरव्यू में जंतर-मंतर प्रदर्शन, कथित पुलिस कार्रवाई, नागरिक अधिकारों, चुनाव आयोग और देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल पर अपनी बात रखी। इंटरव्यू के दौरान उन्होंने दावा किया कि 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले उन्हें गुरुग्राम स्थित उनके आवास से बाहर जाने से रोका गया, जिसे उन्होंने नागरिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया।

गुरुग्राम में रोके जाने का दावा

ध्रुव राठी ने इंटरव्यू में कहा कि उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार नहीं किया गया था, बल्कि पुलिस ने उन्हें उनके आवास से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी। उनके अनुसार, उन्हें किसी गिरफ्तारी वारंट या स्पष्ट कानूनी आदेश की जानकारी नहीं दी गई।

राठी ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों के विपरीत बताते हुए इसे “अघोषित इमरजेंसी” जैसा माहौल बताया। हालांकि, इस संबंध में दिल्ली पुलिस का विस्तृत पक्ष इंटरव्यू में शामिल नहीं था।

पुलिस के व्यवहार पर क्या बोले ध्रुव राठी

इंटरव्यू के दौरान ध्रुव राठी ने दावा किया कि ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों का व्यक्तिगत व्यवहार उनके प्रति शालीन था। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ पुलिसकर्मियों ने अनौपचारिक बातचीत में उनके वीडियो देखने और व्यक्तिगत स्तर पर सहमति जताने की बात कही, लेकिन वे वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के कारण कार्रवाई करने को बाध्य थे।

इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

“मैं किसी राजनीतिक दल का समर्थक नहीं”

बीबीसी से बातचीत में ध्रुव राठी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन करना नहीं, बल्कि उन नीतियों का विरोध करना है जिन्हें वे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ मानते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी या कोई अन्य जनप्रतिनिधि चुनाव सुधार अथवा जनहित में सकारात्मक कदम उठाते हैं, तो वे उसका समर्थन करने में भी संकोच नहीं करेंगे। उनके अनुसार, उनका समर्थन व्यक्ति या दल नहीं, बल्कि मुद्दों और नीतियों के आधार पर होता है।

चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर टिप्पणी

इंटरव्यू में ध्रुव राठी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है। उन्होंने जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के संदर्भ में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग का भी उल्लेख किया।

कानूनी अधिकारों पर चर्चा

इंटरव्यू में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य फैसले का भी उल्लेख हुआ। यह निर्णय गिरफ्तारी और पुलिस हिरासत के दौरान नागरिकों के अधिकारों तथा पुलिस द्वारा अपनाई जाने वाली अनिवार्य कानूनी प्रक्रियाओं से संबंधित है। बातचीत के दौरान इस बात पर चर्चा हुई कि यदि किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया जाता है तो कानून के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए।

प्रमुख घटनाक्रम

  • 8–9 अक्टूबर 2026: ध्रुव राठी की भारत यात्रा और दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियों की चर्चा तेज हुई।
  • 10 अक्टूबर 2026: जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले ध्रुव राठी ने दावा किया कि उन्हें गुरुग्राम स्थित आवास से बाहर जाने से रोका गया।
  • 14 अक्टूबर 2026: बीबीसी न्यूज़ हिंदी ने ध्रुव राठी का विस्तृत इंटरव्यू प्रसारित किया।
  • अक्टूबर 2026: जंतर-मंतर प्रदर्शन और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और बहस जारी रही।

समर्थकों और आलोचकों की अलग-अलग राय

ध्रुव राठी के इंटरव्यू के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। समर्थकों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा बताया, जबकि आलोचकों ने राजनीतिक आंदोलनों में बड़े सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की सक्रिय भागीदारी पर सवाल उठाए।

निष्कर्ष

बीबीसी न्यूज़ हिंदी को दिया गया ध्रुव राठी का यह इंटरव्यू डिजिटल मीडिया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, पुलिस कार्रवाई और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर नई बहस को जन्म देता है। इंटरव्यू में व्यक्त कई बातें ध्रुव राठी के व्यक्तिगत दावों और विचारों पर आधारित हैं, जबकि संबंधित एजेंसियों का पक्ष भी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण है।

ऐसे मामलों में अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया, आधिकारिक जांच और सत्यापित तथ्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी। फिलहाल यह विवाद डिजिटल युग में सोशल मीडिया, राजनीति और लोकतांत्रिक संस्थाओं के बदलते संबंधों पर एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बना हुआ है।

(नोट: इस रिपोर्ट में ध्रुव राठी के इंटरव्यू में व्यक्त दावों और विचारों का समाचारात्मक प्रस्तुतीकरण किया गया है। जिन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, उन्हें उसी रूप में प्रस्तुत किया गया है।)

यह संस्करण प्रकाशन-योग्य, संतुलित और पत्रकारिता के मानकों के अनुरूप है तथा अनावश्यक लाइन, लिंक और दोहराव हटा दिए गए हैं।

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