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लोकतंत्र संकट

 
 

संपादकीय: लोकतंत्र, जनता का तंत्र या सत्ता का हथियार?

ediotorial on democratic values

जब लोकतांत्रिक संस्थाएं जनता के हितों के बजाय सत्ता के हितों की रक्षा करने लगती हैं, तब लोकतंत्र की आत्मा कमजोर होने लगती है। जनता का तंत्र या सत्ता का हथियार : लोकतंत्र का अर्थ केवल चुनाव, सरकार और सत्ता परिवर्तन नहीं है। लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ है — जनता का तंत्र, जहां जनता सर्वोच्च होती है, जहां उसकी आवाज सत्ता तक पहुंचती है और जहां असहमति को देशद्रोह नहीं बल्कि लोकतंत्र की ताकत माना जाता है। लेकिन जब यही तंत्र सत्ता के प्रभाव में आने लगता है, जब लोकतांत्रिकRead More