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गोरखपुर: भारत रत्न नानाजी देशमुख की जयंती पर विचार गोष्ठी का आयोजन, ग्रामोदय और स्वावलंबन पर मंथन

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भारत रत्न नानाजी देशमुख की जयंती: ‘गांवों का विकास ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला’ – गोरखपुर में सेवा न्यास का आयोजन

गोरखपुर। राष्ट्रऋषि, प्रख्यात समाजसेवी एवं ‘अंत्योदय’ के प्रबल समर्थक भारत रत्न नानाजी देशमुख की जन्म जयंती के अवसर पर रविवार को नानाजी देशमुख सेवा न्यास, गोरखपुर के तत्वाधान में एक भव्य पुष्पार्जन एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिकों, प्रबुद्धवर्ग और समाजशास्त्रियों ने भाग लिया तथा नानाजी के व्यक्तित्व, कृतित्व और राष्ट्र निर्माण में उनके अतुलनीय योगदान पर अपने विचार साझा किए।

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जन-भागीदारी और आत्म-निर्भरता ही विकास की कुंजी: डॉ. राजेश चंद्र गुप्ता ‘विक्रमी’

कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. राजेश चंद्र गुप्ता ‘विक्रमी’ ने कहा कि नानाजी देशमुख ने अपना संपूर्ण जीवन समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान, ग्रामीण विकास और सामाजिक समरसता के लिए समर्पित कर दिया।

उन्होंने जोर देकर कहा,

“नानाजी का स्पष्ट मानना था कि वास्तविक सामाजिक और आर्थिक बदलाव सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि जन-भागीदारी, सेवा भावना और आत्मनिर्भरता के संकल्प से ही संभव है।”

गांवों का विकास ही देश की आधारशिला: डॉ. महेंद्र कुमार अग्रवाल

न्यास के मुख्य न्यासी डॉ. महेंद्र कुमार अग्रवाल ने नानाजी के ग्रामोद्धार के विजन को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। नानाजी ने ग्रामोदय की अवधारणा को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे धरातल पर उतारकर ग्रामीण समुदायों को आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग और समाज की सामूहिक चेतना को जगाने का ऐतिहासिक कार्य किया।

नानाजी देशमुख और पांचजन्य का ऐतिहासिक संबंध: ई. अरुण प्रकाश मल्ल

नानाजी के साथ अपने पारिवारिक संस्मरण साझा करते हुए न्यास के सचिव इंजीनियर अरुण प्रकाश मल्ल भावुक हो गए। उन्होंने बताया:

  • नानाजी की प्रेरणा से ही उनके पूज्य पिताजी (कीर्तिशेष) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक बने।
  • उन्होंने 1941 से 1954 तक लगातार नानाजी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य किया।
  • वे प्रसिद्ध राष्ट्रवादी पत्र ‘पांचजन्य’ के शुरुआती प्रकाशन काल तक नानाजी के साथ निरंतर सेवारत रहे।

युवा शक्ति, नैतिक मूल्य और आधुनिक समाज में नानाजी के विचारों की प्रासंगिकता

विचार गोष्ठी के दौरान युवा अधिवक्ता एवं न्यासी शुभेन्द्र सत्यदेव ने नानाजी के चिंतन को विस्तार से प्रस्तुत करते हुए कहा कि एक समर्थ राष्ट्र के निर्माण के लिए गांवों का स्वावलंबी होना अनिवार्य शर्त है। वहीं, न्यास की वरिष्ठ न्यासी पूर्णेन्द्र मिश्रा ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस आयोजन का मूल ध्येय नानाजी के सेवा और समर्पण के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना और युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ना है।

गोष्ठी में न्यासी डॉ. राजेश कुमार बरनवाल तथा हरे कृष्ण सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

वर्तमान समय में नानाजी के विचारों का व्यावहारिक उपयोग: विष्णु अजीत सरिया

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए न्यास के अध्यक्ष विष्णु अजीत सरिया ने कहा कि आज के दौर में नानाजी के ग्राम स्वावलंबन, सामाजिक समरसता, नैतिक मूल्यों और युवा शक्ति के रचनात्मक उपयोग के विचारों को व्यावहारिक जीवन में उतारने की अत्यंत आवश्यकता है।

इस अवसर पर निर्भय कुमार गुप्ता, अनंत नारायण, कविता त्रिपाठी और लालजी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।






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