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‘गुलाबो सिताबो’ फेम फर्रुख जफर और लखनऊ की पहली महिला पत्रकार मेहरु जफर की यादों में डूबा शहर — जानें उनके संघर्ष की अनकही कहानियां!

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Farrukh Jafar & Mehru Jafar Tribute: लखनऊ में याद की गईं अभिनेत्री फर्रुख जफर और लखनऊ की पहली महिला पत्रकार मेहरु जफर, संस्मरणों के जरिए जीवंत हुए उनके संघर्ष

लखनऊ: अभिनय और पत्रकारिता की दुनिया में अपनी अनूठी छाप छोड़ने वाली मशहूर अभिनेत्री फर्रुख जफर और लखनऊ की पहली महिला पत्रकार मेहरु जफर के योगदान को एक बार फिर याद किया गया। मौका था गोमती नगर के लिटिल फ्रेंड्स स्कूल में आयोजित ‘यादें फर्रुख व मेहरु की’ कार्यक्रम का, जिसे ‘संचित स्मृति न्यास’ ने ‘लोक संस्कृति शोध संस्थान’ के सहयोग से आयोजित किया था।

कार्यक्रम में दोनों शख्सियतों के जीवन, उनके संघर्ष और समाज व कला जगत में उनके अतुलनीय योगदान पर खुलकर चर्चा हुई।

14 साल की उम्र में शादी से लेकर ‘गुलाबो सिताबो’ तक का सफर

कार्यक्रम में फर्रुख जफर के प्रेरणादायक जीवन-संघर्ष पर प्रकाश डाला गया। बताया गया कि महज 14 वर्ष की उम्र में उनका विवाह हुआ था। उनके पति एक स्वतंत्रता सेनानी थे। फर्रुख जफर ने न सिर्फ रेडियो में अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दीं, बल्कि गांव की प्रधान बनकर जमीनी स्तर पर भी काम किया।

उनकी अभिनय यात्रा कमाल की रही:

  • सशक्त भूमिकाएं: उन्होंने गमन, उमराव जान, पीपली लाइव और अमिताभ बच्चन-आयुष्मान खुराना स्टारर फिल्म गुलाबो सिताबो जैसी फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीता।
  • फिल्मफेयर अवार्ड: उन्हें उनकी बेहतरीन कला के लिए प्रतिष्ठित फिल्मफेयर अवार्ड से भी नवाजा गया।
  • सीख: उनका पूरा जीवन इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि कला और रचनात्मकता की कोई उम्र सीमा नहीं होती।

मेहरु जफर: बेबाक लेखनी और पत्रकारिता की मिसाल

दूसरी ओर, मेहरु जफर को लखनऊ की पहली महिला पत्रकार के रूप में याद किया गया। वक्ताओं ने बताया कि उन्होंने अपनी बेबाक लेखनी से हमेशा महिलाओं के सुलगते मुद्दों और महत्वपूर्ण सामाजिक सरोकारों को मजबूती से उठाया।

  • खास संस्मरण: प्रख्यात लेखिका व आकाशवाणी की सेवानिवृत्त अधिकारी सलमा हुसैन (दिल्ली से आईं) ने लखनऊ, दिल्ली और पुणे से जुड़ी पुरानी यादें साझा करते हुए कहा कि “लोग भले ही दूर चले जाते हैं, लेकिन उनकी यादें दिलों पर अमिट छाप छोड़ जाती हैं।”
  • प्रखर आवाज़: ताहिरा हसन और अन्य वक्ताओं ने भी मेहरु जफर के निडर और प्रखर पत्रकारिता अंदाज को सराहा। शाहीन अहमद ने अपनी मां और बहन से जुड़ी भावुक स्मृतियां साझा कीं।

इस कार्यक्रम में डॉ. दीक्षा नागर, परवीन तलहा, शाखा बंद्योपाध्याय, डॉ. ऋचा नागर, प्रतुल जोशी, रंगकर्मी तरुण कुमार, डॉ. सुधा द्विवेदी, आभा शुक्ला, डॉ. एसके गोपाल, अजीत पाल और अम्बरीश सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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