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स्मार्ट मीटर के दौर में मीटर रीडर्स का संकट: शासन स्तर पर डेटा सत्यापन तेज, शाहजहांपुर यूनियन ने मांगी सेवा सुरक्षा और समायोजन

Hotlink News (खबरों की खबर)

लखनऊ/शाहजहांपुर: शाहजहांपुर यूनियन ने मांगी सेवा सुरक्षा और समायोजन : उत्तर प्रदेश में कार्यरत आउटसोर्स एवं संविदा कर्मियों, विशेष रूप से विद्युत विभाग के मीटर रीडर्स और बिलिंग कार्य से जुड़े कर्मचारियों के भविष्य को लेकर शासन, निगम और कर्मचारी संगठनों के स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं।

एक तरफ उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS), ऊर्जा विभाग और उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) द्वारा आउटसोर्स कर्मियों का वास्तविक डेटा तैयार करने और सेवाओं को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है, वहीं दूसरी तरफ मैदानी स्तर पर मीटर रीडर्स स्मार्ट मीटर व्यवस्था के कारण रोजगार संकट का सामना करने का दावा कर रहे हैं।

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इसी क्रम में विद्युत संविदा मीटर रीडिंग वर्कर यूनियन, शाहजहांपुर (संबद्ध-इंटक) ने शासन और विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि वर्षों से कार्यरत मीटर रीडर्स को आउटसोर्स सेवा निगम की सूची में शामिल कर उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।


आउटसोर्स कर्मियों के लिए शासन स्तर पर शुरू हुई प्रक्रिया

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं को व्यवस्थित करने के लिए जारी दिशा-निर्देशों के बाद विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मियों का डेटा एकत्र किया जा रहा है।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि प्रदेश के सभी आउटसोर्स कर्मचारियों का एक व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार किया जाए, जिससे उनकी सेवा श्रेणी, कार्य प्रकृति और निर्धारित पारिश्रमिक को स्पष्ट किया जा सके।

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हालांकि, प्रारंभिक सूची में कुछ विभागों और सेवाओं के कर्मचारियों के शामिल नहीं होने की शिकायतें सामने आईं, जिसके बाद उन्हें भी सूची में जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई।


14 सितंबर 2026: छूटी हुई सेवाओं को सूची में शामिल करने की पहल

उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम, लखनऊ के प्रबंध निदेशक द्वारा जारी पत्रांक:

116 / MDUPCOS / 2026

में सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों और विभागाध्यक्षों को अवगत कराया गया कि शासनादेश दिनांक 19 सितंबर 2025 के तहत आउटसोर्स कर्मियों की चार श्रेणियां निर्धारित की गई थीं।

लेकिन कई विभागों की ओर से यह जानकारी दी गई कि कुछ महत्वपूर्ण सेवाएं इन श्रेणियों में शामिल नहीं हो पाई हैं।

निगम ने संबंधित विभागों से कहा कि वे छूटी हुई सेवाओं का पूरा विवरण उपलब्ध कराएं, जिसमें—

  • सेवा का नाम
  • कार्य की प्रकृति
  • शैक्षिक योग्यता
  • श्रेणी
  • निर्धारित पारिश्रमिक

शामिल हो, ताकि उन्हें निर्धारित सूची में जोड़ा जा सके।

विद्युत विभाग से जुड़े मीटर रीडर्स और अन्य मैदानी कर्मचारियों के लिए यह पत्र महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनके डेटा को आधिकारिक व्यवस्था में शामिल करने का रास्ता खुल सकता है।


01 अक्टूबर 2026: ऊर्जा विभाग ने निगमों को दिए निर्देश

ऊर्जा अनुभाग-2, उत्तर प्रदेश शासन के अनु सचिव ओंकार सिंह द्वारा जारी पत्रांक:

I/1483566/2026

के माध्यम से उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड, विद्युत उत्पादन निगम, ट्रांसमिशन निगम और विद्युत सुरक्षा निदेशालय के प्रबंध निदेशकों को निर्देश दिए गए।

पत्र में आउटसोर्स सेवा निगम द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का संज्ञान लेते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने और उसकी रिपोर्ट शासन एवं आउटसोर्स सेवा निगम को उपलब्ध कराने को कहा गया।

इससे संकेत मिलता है कि आउटसोर्स कर्मियों के आंकड़ों और सेवा विवरण को लेकर विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है।


05 अक्टूबर 2026: UPCOS पोर्टल पर डेटा फीडिंग के निर्देश

समग्र शिक्षा (माध्यमिक), लखनऊ के अपर राज्य परियोजना निदेशक द्वारा जारी पत्र में प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिए गए कि उनके अधीन कार्यरत सभी आउटसोर्स कर्मचारियों का सही और त्रुटिरहित डेटा UPCOS पोर्टल पर दर्ज कराया जाए।

डेटा फीडिंग की अंतिम तिथि:

10 अक्टूबर 2026

निर्धारित की गई थी।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों का एक केंद्रीकृत रिकॉर्ड तैयार करना है, जिससे कर्मचारियों की संख्या, कार्य और सेवा श्रेणी स्पष्ट हो सके।


12 अक्टूबर 2026: UPPCL ने मांगा आउटसोर्स कर्मियों का पूरा विवरण

उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड, शक्ति भवन लखनऊ के महाप्रबंधक (औ.सं.) प्रदीप कुमार द्वारा जारी पत्र संख्या:

2116–औसं०/26(01)ए०एस०/2020

के माध्यम से प्रदेश के प्रमुख विद्युत वितरण निगमों को निर्देश दिए गए।

पत्र पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगमों और केस्को के प्रबंध निदेशकों को भेजा गया।

इसमें वर्तमान में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या और अनुबंधवार विवरण निर्धारित प्रारूप में तत्काल उपलब्ध कराने को कहा गया।

यह कदम विद्युत क्षेत्र में कार्यरत आउटसोर्स कर्मियों, जिसमें मीटर रीडर्स भी शामिल हैं, का वास्तविक आंकड़ा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


शाहजहांपुर में मीटर रीडर्स का दर्द: स्मार्ट मीटर से रोजगार संकट का दावा

इसी बीच शाहजहांपुर की विद्युत संविदा मीटर रीडिंग वर्कर यूनियन ने विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन देकर अपनी समस्याएं सामने रखी हैं।

यूनियन ने मुख्य अभियंता (बरेली क्षेत्र) और अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण खंड जलालाबाद को दिए पत्र में कहा है कि मीटर रीडर्स लंबे समय से विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन स्मार्ट मीटर व्यवस्था लागू होने के बाद उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

यूनियन का कहना है कि—

  • कई कर्मचारी वर्षों से मीटर रीडिंग का कार्य कर रहे हैं।
  • स्मार्ट मीटर आने से पारंपरिक मीटर रीडिंग कार्य प्रभावित हो रहा है।
  • इससे कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक कठिनाई पैदा हो रही है।

मीटर रीडर्स ने रखी डेटा समायोजन की मांग

शाहजहांपुर यूनियन ने मांग की है कि—

  • जलालाबाद क्षेत्र सहित सभी मीटर रीडर्स का डेटा आउटसोर्स सेवा निगम में दर्ज किया जाए।
  • वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को सूची से बाहर न किया जाए।
  • शासन और निगम स्तर पर चल रही डेटा फीडिंग प्रक्रिया में मीटर रीडर्स को प्राथमिकता दी जाए।
  • स्मार्ट मीटर व्यवस्था के कारण प्रभावित कर्मचारियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए।

ज्ञापन पर तहसील अध्यक्ष आलोक कुमार सहित 36 से अधिक मीटर रीडर्स और संविदा कर्मियों के हस्ताक्षर बताए गए हैं।


क्यों महत्वपूर्ण है यह पूरी प्रक्रिया?

मीटर रीडर्स विद्युत वितरण व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी रहे हैं। वे उपभोक्ताओं के परिसरों तक पहुंचकर मीटर रीडिंग, बिलिंग और संबंधित फील्ड कार्यों में योगदान देते हैं।

लेकिन स्मार्ट मीटर तकनीक के विस्तार के बाद पारंपरिक मीटर रीडिंग व्यवस्था में बदलाव आया है। ऐसे में हजारों आउटसोर्स कर्मियों के सामने रोजगार और भविष्य की सुरक्षा का सवाल खड़ा हो गया है।

अब शासन स्तर पर डेटा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होने से कर्मचारियों को उम्मीद है कि उनकी वास्तविक संख्या और सेवा स्थिति रिकॉर्ड में आएगी।


मीटर रीडर्स और आउटसोर्स कर्मियों की प्रमुख मांगें

कर्मचारी संगठनों की ओर से मुख्य रूप से मांग की जा रही है—

✅ सभी मीटर रीडर्स और छूटे हुए आउटसोर्स कर्मचारियों को आधिकारिक सूची में शामिल किया जाए।

✅ UPCOS पोर्टल पर सभी कर्मचारियों का सही डेटा दर्ज किया जाए।

✅ स्मार्ट मीटर व्यवस्था से प्रभावित कर्मचारियों के लिए रोजगार सुरक्षा नीति बनाई जाए।

✅ सभी कर्मचारियों को समय पर पारिश्रमिक, ईएसआई और पीएफ जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

✅ आउटसोर्स व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।


निष्कर्ष: डेटा से अधिकार तक की उम्मीद

उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स संविदा कर्मियों और मीटर रीडर्स को लेकर जारी पत्रों और विभागीय गतिविधियों से स्पष्ट है कि कर्मचारियों का डेटा एकत्र करने और सेवा व्यवस्था को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया तेज हो चुकी है।

अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि इस डेटा प्रक्रिया का लाभ वास्तविक रूप से वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों तक पहुंचे।

मीटर रीडर्स और संविदा कर्मियों की नजर अब इस बात पर है कि शासन और निगम स्तर पर चल रही यह कवायद केवल आंकड़ों तक सीमित रहती है या वास्तव में उन्हें रोजगार सुरक्षा, उचित पारिश्रमिक और सम्मानजनक सेवा व्यवस्था का लाभ मिलता है।

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