पीयूष गोयल का बड़ा बयान और चौंकाने वाला सच: क्या 2000 में कांग्रेस सरकार थी?

क्या 2000 में कांग्रेस सरकार थी? : तथ्य जाँच (Fact Check) और न्यूज़ रिपोर्ट
तथ्य जाँच (Fact Check Report)
नई दिल्ली: हाल ही में देश की राजनीति में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और अतीत के फैसलों को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एम.एस. गिल को वर्ष 2000 में ‘पद्म विभूषण’ दिए जाने को लेकर कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा गया था।
क्या 2000 में कांग्रेस सरकार थी?
- दावा: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल द्वारा उठाए गए सवाल के अनुसार, वर्ष 2000 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एम.एस. गिल को देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ दिया जाना कांग्रेस सरकार द्वारा दिया गया प्रलोभन या ‘रिश्वत’ था।
- तथ्य (Reality):
- यह बात बिल्कुल सही है कि डॉ. एम.एस. गिल को वर्ष 2000 में ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया था।
- लेकिन, वर्ष 2000 में केंद्र में कांग्रेस पार्टी की सरकार नहीं थी, बल्कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत ‘राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन’ (NDA) की सरकार सत्ता में थी।
- इसके अलावा, एम.एस. गिल अपनी सेवानिवृत्ति के बाद वर्ष 2004 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए थे और 2008 में मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री बने थे। अतः वर्ष 2000 में पुरस्कार देते समय कांग्रेस सरकार का होना या इसे कांग्रेस द्वारा दिया गया प्रलोभन बताना तथ्यात्मक रूप से गलत है, क्योंकि उस समय देश में एनडीए (भाजपा गठबंधन) की सरकार थी।
पीयूष गोयल ने आरोप लगाया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर रहते हुए इस तरह का बड़ा नागरिक सम्मान देना एक प्रकार का प्रलोभन या उपकृत करने जैसा था। हालांकि, इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक विश्लेषकों और सोशल मीडिया पर इतिहास के पन्नों को खंगाला गया, जिसमें एक बड़ा तथ्यात्मक विरोधाभास सामने आया है।
इतिहास के पन्ने क्या कहते हैं? तथ्यों के मुताबिक, वर्ष 2000 में जब डॉ. एम.एस. गिल को देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से नवाजा गया था, तब केंद्र में कांग्रेस पार्टी की सरकार नहीं थी। उस दौरान देश के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे और केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का शासन था। ऐसे में इस पुरस्कार को कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से जोड़कर देखना तथ्यात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण पाया गया है।
राजनीतिक जानकारों का यह भी कहना है कि एम.एस. गिल इसके कई वर्षों बाद यानी 2004 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए थे और 2008 में मनमोहन सिंह के कार्यकाल में मंत्री बने थे। बहरहाल, वर्तमान राजनीतिक माहौल में चुनाव आयोग के पुराने और नए घटनाक्रमों को लेकर दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे पर हमलावर हैं।
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