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जल संकट का समाधान और ‘हीडेन वेटलैंड्स’: लखनऊ में पर्यावरण संरक्षण की नई दिशा पर मंथन

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स्थान: लखनऊ दिनांक: 11 अक्टूबर 2026 : लखनऊ में पर्यावरण संरक्षण की नई दिशा पर मंथन

प्रमुख बिंदु (At a Glance)

  • मुख्य विषय: शहरी जल संकट और भूमिगत आर्द्रभूमि (Subsurface Wetlands) आधारित जल शोधन प्रणालियाँ।
  • प्रमुख कृति: डॉ. अभिनव दीक्षित की पुस्तक ‘हीडेन वेटलैंड्स’ (Hidden Wetlands) का लोकार्पण।
  • आयोजन: जनवीणा प्रकाशन द्वारा राष्ट्रीय पुस्तक मेले के क्रिएटिव लाउंज में विशेष समारोह।
  • निष्कर्ष: पारंपरिक जल स्रोतों पर निर्भरता कम करने और अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग (Recycling) के लिए आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक अपनाने की अनिवार्यता।

1. पृष्ठभूमि और संदर्भ (Background Context)

तेजी से बढ़ते शहरीकरण, भूजल स्तर में भारी गिरावट और जल स्रोतों के प्रदूषण ने लखनऊ सहित पूरे देश के सामने गंभीर जल संकट खड़ा कर दिया है। इसी ज्वलंत मुद्दे के वैज्ञानिक समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, शनिवार को राष्ट्रीय पुस्तक मेले के दौरान डॉ. अभिनव दीक्षित की पुस्तक ‘हीडेन वेटलैंड्स’ का लोकार्पण किया गया।

यह कृति केवल एक साहित्यिक प्रकाशन नहीं है, बल्कि यह नगरीय जल प्रबंधन (Urban Water Management) के क्षेत्र में एक व्यावहारिक शोध और नीतिगत दस्तावेज के रूप में सामने आई है।

2. अंतरराष्ट्रीय अनुभव और अनुसंधान (Research Insights)

पुस्तक के लेखक डॉ. अभिनव दीक्षित ने जर्मनी की प्रतिष्ठित टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ बर्लिन (Technical University of Berlin) से शहरी जल प्रणालियों पर गहन शोध किया है।

  • प्रेरणा का स्रोत: लेखक के अनुसार, मिस्र के रेगिस्तानी शहर एल गौना (El Gouna) में जल संकट से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना का नेतृत्व करते समय उन्हें इस पुस्तक की वैचारिक प्रेरणा मिली।
  • तकनीक का आधार: पुस्तक में मुख्य रूप से भूमिगत आर्द्रभूमि आधारित जल शोधन प्रणालियों (Subsurface Wetland-based Water Treatment Systems) पर जोर दिया गया है। रेगिस्तानी और जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में यह तकनीक प्राकृतिक तरीके से गंदे पानी को शुद्ध कर सिंचाई या अन्य उपयोग के योग्य बनाने में अत्यंत प्रभावी साबित हो सकती है।

3. वक्ताओं के मुख्य विचार और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण

लोकार्पण समारोह में उपस्थित प्रतिष्ठित साहित्यकारों, वैज्ञानिकों और प्रशासनिक विशेषज्ञों ने जल संरक्षण के वर्तमान परिदृश्य पर गंभीर चिंता व्यक्त की और समाधान पर चर्चा की:

  • संसाधनों का पुनः उपयोग समय की मांग: वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि केवल भूजल दोहन पर रोक लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि अपशिष्ट जल (Wastewater) के वैज्ञानिक शोधन और उसके रीसाइक्लिंग को नीतिगत स्तर पर अनिवार्य बनाया जाना चाहिए।
  • नीति निर्धारकों के लिए मार्गदर्शिका: यह पुस्तक नीति निर्माताओं (Policymakers), अभियंताओं (Engineers) और जल प्रबंधन से जुड़े पेशेवरों के लिए एक व्यावहारिक गाइड का काम करेगी, जिससे भविष्य की शहरी जल नीतियों की रूपरेखा तैयार की जा सकेगी।

4. कार्यक्रम की प्रमुख उपस्थिति

इस बौद्धिक एवं साहित्यिक महाकुंभ में शहर के कई प्रबुद्ध नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई:

  • समारोह का संचालन: जनवीणा प्रकाशन के निदेशक डॉ. एस.के. गोपाल द्वारा किया गया।
  • सांस्कृतिक शुरुआत: कार्यक्रम का शुभारंभ सौरभ कमल द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ।
  • गणमान्य अतिथि: वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. करुणा पांडे, अशोक बनर्जी, राज वर्मा, वैज्ञानिक अभय दीक्षित, व्यंग्यकार सर्वेश अस्थाना, प्रो. मुकुंद शर्मा, कृषि वैज्ञानिक कमलेश कुमार पाठक सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी और शोधार्थी उपस्थित रहे।

आगे की राह

‘हीडेन वेटलैंड्स’ का प्रकाशन ऐसे समय में हुआ है जब जल प्रबंधन केवल एक तकनीकी विषय न रहकर मानव अस्तित्व की अनिवार्य शर्त बन चुका है। यदि इस पुस्तक में सुझाई गई भूमिगत आर्द्रभूमि प्रणालियों को शहरी नियोजन (Urban Planning) में शामिल किया जाए, तो यह भविष्य के जल संकट से निपटने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।






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