संपादकीय: लोकतंत्र, जनता का तंत्र या सत्ता का हथियार?

जब लोकतांत्रिक संस्थाएं जनता के हितों के बजाय सत्ता के हितों की रक्षा करने लगती हैं, तब लोकतंत्र की आत्मा कमजोर होने लगती है।
जनता का तंत्र या सत्ता का हथियार : लोकतंत्र का अर्थ केवल चुनाव, सरकार और सत्ता परिवर्तन नहीं है। लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ है — जनता का तंत्र, जहां जनता सर्वोच्च होती है, जहां उसकी आवाज सत्ता तक पहुंचती है और जहां असहमति को देशद्रोह नहीं बल्कि लोकतंत्र की ताकत माना जाता है।
लेकिन जब यही तंत्र सत्ता के प्रभाव में आने लगता है, जब लोकतांत्रिक संस्थाएं जनता के हितों के बजाय सत्ता के हितों की रक्षा करने लगती हैं, तब लोकतंत्र की आत्मा कमजोर होने लगती है।
आज सबसे बड़ी विडंबना है कि आँखों में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं, सत्ता येन केन प्रकारेण हासिल करनी है चाहे उसके लिए इलेक्शन कमिशन का दुरुपयोग करना पड़े, चाहे सुप्रीम कोर्ट को। वरना पिछले दो महत्वपूर्ण राज्यों में बिहार और बंगाल, भीषण जन विरोध को नजर अंदाज करते हुए, सरकार के पक्ष लोकतान्त्रिक संस्थाएं जिनको निगरानी का काम सौंपा गया है, वे सत्ता के लिए काम करती नजर आयीं।
विपक्ष एकजुट हुआ, आवाज उठाता ही रह गया, चोर चोर पर, पर चौकीदार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। तभी आज देश का युवा जाग उठा है, अपने लोकतंत्र को बचाने के लिए।
जंतर मंतर पार्ट 1 हो या 2 पर दोनों में अप्रत्याशित रूप से युवाओं का एकत्रित होना, और उससे भी महत्वपूर्ण था अहिंसक होना, एक बड़ा संकेत है, जिसे सरकार को समय रहते पहचान लेना चाहिए, अन्यथा ये उग्र भी हो सकता है।
लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि इसमें जनता को सवाल पूछने, विरोध करने और अपनी बात रखने का अधिकार होता है।
मगर जब जनता की आवाज को दबाया जाने लगे, सवाल करने वालों को खामोश किया जाने लगे और विरोध को अपराध की तरह देखा जाने लगे, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बन जाता है।
लोकतंत्र में सरकार जनता द्वारा चुनी जाती है, लेकिन चुनी हुई सरकार को भी जनता के प्रति जवाबदेह रहना पड़ता है। सत्ता का अर्थ मनमानी करने का अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने का दायित्व है। इतिहास गवाह है कि जब-जब सत्ता ने अपनी सीमाएं भूलकर निरंकुशता का रास्ता अपनाया है, तब-तब लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचा है।
किसी भी लोकतांत्रिक समाज में विरोध की आवाज को सुनना सत्ता की कमजोरी नहीं बल्कि उसकी मजबूती होती है। लेकिन जब प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसती हैं, जब बल प्रयोग को संवाद का विकल्प बना दिया जाता है, जब नागरिकों के सवालों का जवाब देने के बजाय उन्हें दबाने की कोशिश होती है, तब लोकतंत्र की बुनियाद पर सवाल खड़े होते हैं।
सबसे बड़ा खतरा तब पैदा होता है जब संस्थाएं, जो संविधान की रक्षा के लिए बनाई गई हैं, धीरे-धीरे सत्ता के दबाव में काम करने लगती हैं। लोकतंत्र केवल संसद और चुनावों से जीवित नहीं रहता, बल्कि स्वतंत्र संस्थाओं, निष्पक्ष व्यवस्था, स्वतंत्र मीडिया और जागरूक नागरिकों से मजबूत होता है।
सत्ता का स्वभाव ही ऐसा है कि वह विस्तार चाहती है। इसलिए लोकतंत्र में नियंत्रण और संतुलन (Checks and Balances) बेहद जरूरी हैं। यदि सत्ता को कोई चुनौती देने वाला न हो, यदि सवाल पूछने वालों को चुप करा दिया जाए, तो लोकतंत्र धीरे-धीरे केवल नाम मात्र की व्यवस्था बनकर रह सकता है।
भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत इसकी विविधता और असहमति की परंपरा रही है। यहां अलग-अलग विचारों, विरोधी आवाजों और आलोचनाओं के लिए जगह रही है। क्योंकि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना देश की आलोचना नहीं होती, बल्कि बेहतर शासन की दिशा में एक जरूरी कदम होती है।
जब जनता को लगे कि उसकी आवाज सुनी नहीं जा रही, जब अधिकार मांगने वालों को ही समस्या मान लिया जाए, तब लोकतंत्र का मूल उद्देश्य कमजोर पड़ता है। सत्ता चाहे किसी भी दल की हो, लोकतंत्र किसी एक व्यक्ति, पार्टी या सरकार की संपत्ति नहीं हो सकता। यह करोड़ों नागरिकों की सामूहिक विरासत है।
महाभारत में द्रौपदी का चीरहरण केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं था, बल्कि उस व्यवस्था की विफलता का प्रतीक था जहां शक्तिशाली लोगों के सामने न्याय मौन हो गया था। उसी तरह लोकतंत्र भी तब घायल होता है जब सत्ता का अहंकार जनता के अधिकारों पर भारी पड़ने लगता है।
लोकतंत्र को बचाने की जिम्मेदारी केवल नेताओं या संस्थाओं की नहीं है। यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह सवाल पूछे, जागरूक रहे और संविधान में दिए गए अधिकारों को समझे। क्योंकि लोकतंत्र की असली ताकत सत्ता के महलों में नहीं, बल्कि जनता की आवाज में बसती है।
अंततः याद रखना होगा — लोकतंत्र जनता से बनता है, जनता के लिए चलता है और जनता की आवाज से ही जीवित रहता है। जिस दिन जनता की आवाज दबने लगेगी, उस दिन लोकतंत्र केवल एक शब्द बनकर रह जाएगा।
— तेज प्रकाश, संपादक, हॉटलिंक न्यूज़
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