जब शिक्षक पढ़ाने के बजाय सर्वे और ऐप में उलझेंगे तो कैसे सुधरेगी शिक्षा?

बेसिक शिक्षक संघ ने उठाया सरकारी स्कूलों की बदहाली का मुद्दा
Hotlink News (खबरों की खबर) – लखनऊ
लखनऊ: जब शिक्षक पढ़ाने के बजाय सर्वे और ऐप में उलझेंगे तो कैसे सुधरेगी शिक्षा? : सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नियुक्त शिक्षक यदि लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त रहेंगे तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा। इसी मुद्दे को लेकर उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षक संघ ने प्रदेश सरकार से शिक्षकों को अनावश्यक सर्वेक्षणों और विभिन्न विभागों के ऐप आधारित कार्यों से मुक्त करने की मांग की है।
संघ का कहना है कि विद्यालयों में शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, लेकिन वर्तमान में स्वास्थ्य, परिवहन, नगर निगम, जिला पंचायत, अग्निशमन, पुलिस और अन्य विभागों के सर्वे कार्यों में शिक्षकों का समय लगातार खर्च हो रहा है। इसका परिणाम यह है कि कक्षाओं में पढ़ाई का समय कम हो रहा है और सरकारी विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
शिक्षकों का समय पढ़ाई के बजाय सर्वे में हो रहा खर्च
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षक संघ के प्रदेश संगठन मंत्री सुशील सिन्हा ने मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में कहा कि विद्यालयों में लगातार नए-नए सर्वे ऐप और ऑनलाइन कार्य दिए जा रहे हैं। इन कार्यों को पूरा करने के दबाव में शिक्षक बच्चों की पढ़ाई, पाठ योजना और शैक्षणिक गतिविधियों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।
संघ ने सवाल उठाया कि यदि शिक्षक अपना अधिकतर समय विभागीय सर्वे, डेटा फीडिंग और मोबाइल ऐप के काम में लगाएंगे तो सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता कैसे बेहतर होगी?
सरकारी स्कूलों में बच्चों के भविष्य पर असर की चिंता
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर बच्चों की नींव मजबूत करने के लिए शिक्षक का नियमित रूप से कक्षा में मौजूद रहना जरूरी है। शिक्षक यदि बार-बार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाएंगे तो कमजोर वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को इसका सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
संघ ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में पहले से ही शिक्षकों पर शिक्षण के अलावा कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में नए-नए सर्वे कार्य शिक्षा व्यवस्था को और प्रभावित कर रहे हैं।
अनावश्यक ऐप से साइबर सुरक्षा का खतरा
संघ ने विभिन्न ऐप आधारित कार्यों को लेकर साइबर सुरक्षा की चिंता भी जताई है। ज्ञापन में कहा गया है कि कई शिक्षक और कर्मचारी अनजान ऐप डाउनलोड करने को मजबूर होते हैं, जिससे मोबाइल डेटा चोरी, बैंक खातों से जुड़ी सुरक्षा और व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है।
संघ ने मांग की है कि यदि कोई सरकारी सर्वे जरूरी है तो उसे केवल अधिकृत सरकारी पोर्टल जैसे यू-डाइस (U-DISE) या अन्य आधिकारिक माध्यमों से ही कराया जाए।
शिक्षकों को केवल शिक्षण कार्य में लगाने की मांग
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षक संघ ने सरकार से मांग की है कि:
- शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक सर्वे कार्यों से मुक्त किया जाए।
- किसी भी विभाग को सर्वे की आवश्यकता हो तो संबंधित विभाग स्वयं इसकी जिम्मेदारी निभाए।
- विद्यालयों में शिक्षकों का समय केवल बच्चों की शिक्षा और शैक्षणिक सुधार में लगाया जाए।
- प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों के सम्मान एवं कार्य वातावरण को सुरक्षित रखा जाए।
शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों की शिक्षा सीधे तौर पर शिक्षकों की उपलब्धता और समय से जुड़ी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या शिक्षक को शिक्षक रहने दिया जाएगा या उसे डेटा ऑपरेटर और सर्वे कर्मचारी बना दिया जाएगा?
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षक संघ का यह विरोध केवल शिक्षकों की मांग नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़ा मुद्दा बन गया है।
Hotlink News (खबरों की खबर) | शिक्षा संवाददाता, लखनऊ


