जंतर-मंतर विवाद: CJP के दो नेता 5 दिन की न्यायिक हिरासत में, ‘इमरजेंसी 2.0’ को लेकर सियासत तेज

नई दिल्ली: CJP के दो नेता 5 दिन की न्यायिक हिरासत में : जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन और तिरंगा फहराने के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका और मुख्य प्रवक्ता सौरव दास को दिल्ली की अदालत ने 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इस घटनाक्रम के बाद मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है और पार्टी ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाया है।
पुलिस का पक्ष
दिल्ली पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद भी कुछ प्रदर्शनकारी वहां पहुंचे और बैरिकेडिंग पार कर प्रवेश किया। पुलिस का कहना है कि आरोपियों पर पहले भरे गए शांति बनाए रखने के बॉन्ड (Peace Bond) के कथित उल्लंघन का भी मामला बनता है।
पुलिस ने बताया कि कुल 14 लोगों के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें सरकारी आदेशों की अवहेलना, पुलिस कार्य में बाधा डालने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
अदालत का आदेश
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने आशुतोष रांका और सौरव दास को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। वहीं, इसी मामले में गिरफ्तार किए गए अजिंक्य शिंदे को व्यक्तिगत मुचलके और जमानत की शर्तों पर राहत मिल गई।
CJP का आरोप
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि पार्टी नेताओं को केवल जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के कारण जेल भेजा गया है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए सरकार पर “इमरजेंसी 2.0” जैसे हालात पैदा करने का आरोप लगाया।
पार्टी का कहना है कि सरकार विरोध प्रदर्शन और असहमति की आवाज़ को दबाने का प्रयास कर रही है।
सरकार की ओर से
समाचार लिखे जाने तक केंद्र सरकार की ओर से CJP द्वारा लगाए गए “इमरजेंसी 2.0” संबंधी आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह विवाद केवल दो नेताओं की न्यायिक हिरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि विरोध प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शन की अनुमति और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर भी बहस का विषय बन गया है। आगे की न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस जांच के आधार पर मामले में नई जानकारी सामने आ सकती है।
फैक्ट बॉक्स
- मामला: जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन
- न्यायिक हिरासत: 5 दिन
- मुख्य आरोपी: आशुतोष रांका, सौरव दास
- अन्य आरोपी: कुल 14 लोगों पर दो एफआईआर
- राहत: अजिंक्य शिंदे को जमानत
- पुलिस का आरोप: शांति बॉन्ड उल्लंघन, सरकारी आदेश की अवहेलना, पुलिस कार्य में बाधा
- CJP का आरोप: लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन, “इमरजेंसी 2.0”
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