ससुराल के पैसों से खरीदी प्रॉपर्टी पर पति का दावा खारिज! हाईकोर्ट ने दिया मकान खाली करने का अल्टीमेटम

सिर्फ नाम जुड़ने से नहीं बनता ! केरल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला—संयुक्त संपत्ति पर पत्नी को मिला अकेले कब्जा
तिरुवनंतपुरम: ससुराल के पैसों से खरीदी प्रॉपर्टी पर पति का दावा खारिज : क्या संपत्ति के सरकारी कागजातों पर पति और पत्नी दोनों के नाम दर्ज होने का मतलब यह है कि दोनों उस संपत्ति के आधे-आधे मालिक हैं? केरल हाईकोर्ट ने इस भ्रम को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अदालत ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि दस्तावेजों में सिर्फ नाम होना ही बराबर की हिस्सेदारी का सबूत नहीं है। असली मालिकाना हक इस बात से तय होगा कि संपत्ति खरीदने के लिए पैसा किसने दिया था और उस समय पक्षकारों की मंशा क्या थी।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 2.8 एकड़ जमीन और उस पर बने एक आलीशान मकान से जुड़ा है, जिसे पति और पत्नी के संयुक्त (Joint) नाम पर खरीदा गया था।
- पत्नी का पक्ष: संपत्ति खरीदने के लिए पूरी रकम उसके पिता ने उपहार (Gift) के तौर पर दी थी।
- पति का दावा: उसका भी आर्थिक योगदान था। उसका कहना था कि विदेश में रहने वाले उसके साले ने इसके लिए पैसे भेजे थे।
अदालत में कैसे पलटा पासा? सबूतों ने खोली पोल
मामले की सुनवाई के दौरान कागजी सबूत सबसे बड़े गेमचेंजर साबित हुए:
- पत्नी के पिता की मजबूत दलील: उन्होंने बैंक स्टेटमेंट पेश किया, जिससे साफ झलकता था कि बिक्री विलेख (Sale Deed) निष्पादित होने वाले दिन ही उनके खाते से 25 लाख रुपये निकाले गए थे।
- पति का कमजोर दावा: पति अपने दावे के समर्थन में न तो कोई गवाह पेश कर पाया और न ही विदेश से पैसा भारत आने का कोई बैंक दस्तावेज दिखा सका।
फैमिली कोर्ट का फैसला और हाईकोर्ट की एंट्री
शुरुआत में फैमिली कोर्ट ने माना था कि पूरा पैसा पत्नी के पिता ने ही दिया था, लेकिन फिर भी उसने पति के कथित हिस्से के बदले पत्नी को 15 लाख रुपये देने का आदेश दिया। पति इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंच गया, लेकिन यह दांव उसी पर भारी पड़ गया।
जस्टिस सतीश निनान और जस्टिस पी. कृष्ण कुमार की खंडपीठ ने पति की तमाम तकनीकी दलीलों को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट एक्ट की धारा 14 का हवाला देते हुए कहा कि विवाद को सुलझाने के लिए अदालत परिस्थितियों, धन के स्रोत, आपसी संबंध और व्यवहार को देख सकती है।
हाईकोर्ट का अंतिम फैसला: 3 महीने में घर खाली करने का आदेश
केरल हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश में संशोधन कर दिया, जिसमें पत्नी को 15 लाख रुपये देने को कहा गया था। अदालत ने:
- 2.8 एकड़ जमीन और मकान पर पत्नी का विशेष स्वामित्व (Exclusive Ownership) घोषित किया।
- पति को 3 महीने के भीतर मकान खाली करने का सख्त निर्देश दिया।
क्या सिर्फ पति-पत्नी दोनों का नाम प्रॉपर्टी के कागज़ों में होने से दोनों बराबर के मालिक बन जाते हैं?
केरल हाईकोर्ट ने इस आम धारणा को गलत ठहराते हुए बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि सिर्फ नाम दर्ज होना मालिकाना हक साबित नहीं करता, बल्कि यह देखा जाएगा कि संपत्ति खरीदने के लिए पैसा किसने दिया और खरीद के समय पक्षों की वास्तविक मंशा क्या थी।
मामला 2.8 एकड़ जमीन और एक मकान का था, जो संयुक्त नाम से खरीदा गया था। पत्नी ने साबित किया कि खरीद के लिए 25 लाख रुपये उसके पिता ने उपहार के रूप में दिए थे, जबकि पति अपने आर्थिक योगदान का कोई ठोस बैंक रिकॉर्ड या गवाह पेश नहीं कर सका।
हाईकोर्ट ने सबूतों के आधार पर पत्नी को संपत्ति का एकमात्र वैध मालिक घोषित किया, फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए 15 लाख रुपये के मुआवजे को भी हटाया और पति को तीन महीने के भीतर घर खाली करने का आदेश दे दिया। यह फैसला संयुक्त संपत्ति से जुड़े विवादों में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है।
Related News

भगवान ने नरेंद्र मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री सिर्फ बेइज्जत होने के लिए बनाया है :ध्रुव राठी
ध्रुव राठी ने कहा भगवान ने नरेंद्र मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री सिर्फ बेइज्जत होनेRead More

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की हकीकत: अफवाहों के दौर में सही खबर कैसे पहचानें?
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की हकीकत : व्हाट्सएप पर आने वाले फर्जी मैसेज और अफवाहों से कैसेRead More
