70000 मरे हुए वोटर्स इलेक्शन के बाद वापस आए? – ध्रुव राठी

70000 मरे हुए वोटर्स इलेक्शन के बाद वापस आए? – ध्रुव राठी ने दिल्ली पहुंच कर एक जनसभा में, इलेक्शन कमीशन की कारगुजारियों और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए सबूत पेश किए!
‘नरेंद्र मोदी सोच रहे होंगे इस सज्जन को क्या तकलीफ है?’ – ध्रुव राठी ने खोला चुनावी गड़बड़ी का कच्चा चिट्ठा!
“मैं सोशल मीडिया पर देख रहा था कि हर जगह बात चल रही है कि मैं यहाँ पर ‘रिजीम चेंज’ कराने आया हूँ, सरकार बदलने आया हूँ। एक्चुअली में यह मेरा इंटेंशन नहीं है। ना ही मुझे इलॉन मस्क ने और ना ही जॉर्ज सोरोस ने फंड किया है, खुद के पैसों से आया हूँ यहाँ पे।”
ध्रुव राठी ने क्या कहा
“जब कल मैं लैंड किया, तो मैं सोशल मीडिया पर देख रहा था कि हर जगह बात चल रही है राइट-विंग लोगों के द्वारा, बीजेपी वालों के द्वारा कि मैं यहाँ पर ‘रिजीम चेंज’ (Regime Change) कराने आया हूँ, सरकार बदलने आया हूँ। तो इसको लेकर मैं क्लेरिफाई करना चाहूँगा, एक्चुअली में यह नहीं है मेरा इंटेंशन। मैं रिजीम चेंज नहीं करना चाहता, मैं सरकार नहीं बदलना चाहता। और ना ही मुझे इलॉन मस्क ने और ना ही जॉर्ज सोरोस ने फंड किया है। खुद के पैसों से आया हूँ यहाँ पे।
नरेंद्र मोदी सोच रहे होंगे कि इस सज्जन को क्या तकलीफ है भाई? बीजेपी को वोट करो चाहे आप कांग्रेस को वोट करो, चाहे आप किसी भी पार्टी को सपोर्ट करते हो, यह एक ऐसा मुद्दा है जो हर देशवासी को कंसर्न करता है, हर देशवासी का मुद्दा है यह।
जो बीजेपी वोटर्स हैं, उनमें से कई लोग कन्विंस नहीं हैं कि यहाँ पर वोट चोरी हो रही है। तो तीन सबूत मैं यहाँ पर दिखाना चाहूँगा। तीन ऐसी चीज़ें जिसका ज्ञानेश कुमार जवाब दे दें, या प्रधानमंत्री मोदी जवाब दे दें, या अमित शाह जवाब दे दें।
सबूत नंबर एक
पहला: वेस्ट बंगाल के इलेक्शन से पहले, SIR के होने से पहले, करीब 70000 मरे हुए वोटर्स ऐसे थे जिन्हें वोटिंग लिस्ट से हटाया गया। लेकिन आगे सुनो, आगे सुनो! इलेक्शन हुई, वो वोट नहीं कर पाए, लेकिन जैसे ही इलेक्शन के रिजल्ट आ गए, उन्हें वापस से वोटिंग लिस्ट में ऐड कर दिया गया। सोच सकते हो? रियल जेन्युइन वोटर्स पहले वोटिंग लिस्ट पर थे, बाद में वोटिंग लिस्ट पर थे, लेकिन बस वोटिंग के समय वोटिंग लिस्ट पर नहीं थे। तो यह जो बहाने मार रहे हैं ना कि ‘यह तो एक्चुअली मुर्दा लोग हैं, यह मरे हुए वोटर्स हैं, यह घुसपैठिये हैं’, मुझे यह बता दो यह लोग बाद में वापस वोटिंग लिस्ट पे क्यों आ गए? 70,000 से ज़्यादा ऐसे वोटर्स हैं सिर्फ वेस्ट बंगाल में।
सबूत नंबर दो
दूसरा: बिहार में क्या हुआ? बिहार में करीब 65 लाख लोगों के नाम वोटिंग लिस्ट से हटाए गए। और ज्ञानेश कुमार ने ज़रुरत नहीं समझी किसी को बताने की कि कौन थे ये लोग, क्या थे इनके नाम, क्या थे इनके एड्रेस। ज्ञानेश कुमार ने यह चीज़ छुपा कर रखी, अंटिल सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर नहीं आ गया कि इन नामों को पब्लिक करो। जब तक बोला नहीं जा रहा, तब तक इलेक्शन कमीशन अपनी तरफ से कुछ नहीं बता रहा है। कोई ट्रांसपेरेंसी नहीं है—ज़ीरो ट्रांसपेरेंसी, ज़ीरो अकाउंटेबिलिटी।
भगवान ने नरेंद्र मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री सिर्फ बेइज्जत होने के लिए बनाया है :ध्रुव राठीध्रुव राठी ने कहा भगवान ने नरेंद्र मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री सिर्फ बेइज्जत होने के लिए बनाया है प्रधानमंत्री मोदी का तीसरा कार्यकाल: उम्मीदें और चुनौतियां साल 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद नरेंद्र मोदी ने गठबंधन सरकार (NDA) के साथ देश के प्रधानमंत्री के रूप में तीसरी बार शपथ ली। इस कार्यकाल की अपनी एक अलग राजनीतिक और आर्थिक गतिशीलता है: ध्रुव राठी के बयान पर जनता की राय और बहस सोशल मीडिया पर इस तरह के बयानों को लेकर मिली-जुली और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती हैं:Read More व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की हकीकत: अफवाहों के दौर में सही खबर कैसे पहचानें?व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की हकीकत : व्हाट्सएप पर आने वाले फर्जी मैसेज और अफवाहों से कैसे बचें? पढ़ें हमारी यह खास गाइड और जानें फैक्ट-चेकिंग के आसान तरीके। हाल के वर्षों में व्हाट्सएप केवल एक मैसेजिंग ऐप नहीं, बल्कि सूचना का सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है। लेकिन जैसे-जैसे इसकी पहुंच बढ़ी है, वैसे-वैसे भ्रामक और फर्जी खबरों का खतरा भी गहराया है। हमारी डिजिटल सुरक्षा और मीडिया साक्षरता गाइड के अनुसार, ऑनलाइन अफवाहें न केवल लोगों को वित्तीय नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि सामाजिक शांति और व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर भी सीधाRead More क्या CEC कानून से भी ऊपर? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से मचा बवालक्या CEC कानून से भी ऊपर? : हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) को मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 (CEC Act, 2023) के तहत दी गई कानूनी सुरक्षा और छूट को लेकर देश में एक बड़ी बहस छिड़ गई है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और राजनीतिक गलियारों में उठ रहे सवालों ने इस विषय को एक गंभीर संपादकीय (Editorial) का मुद्दा बना दिया है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और ‘धारा 16’Read More 70000 मरे हुए वोटर्स इलेक्शन के बाद वापस आए? – ध्रुव राठी70000 मरे हुए वोटर्स इलेक्शन के बाद वापस आए? – ध्रुव राठी ने दिल्ली पहुंच कर एक जनसभा में, इलेक्शन कमीशन की कारगुजारियों और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए सबूत पेश किए! ‘नरेंद्र मोदी सोच रहे होंगे इस सज्जन को क्या तकलीफ है?’ – ध्रुव राठी ने खोला चुनावी गड़बड़ी का कच्चा चिट्ठा! “ना रिजीम चेंज, ना सोरोस की फंडिंग!” – ध्रुव राठी ने आलोचकों को दिया करारा जवाब, पीएम मोदी और चुनाव आयोग से पूछे 3 तीखे सवाल! “खुद के पैसों से आया हूँ!” – सरकार बदलने के आरोपोंRead More डिजिटल मीडिया में राजनीतिक अफ़वाहों का ट्रेंड : आतंकवादियों को किसने छोड़ाडिजिटल मीडिया में राजनीतिक अफ़वाहों का ट्रेंड और हमारी ज़िम्मेदारी आतंकवादियों को किसने छोड़ा : आज के डिजिटल दौर में किसी राजनीतिक दल को निशाना बनाने के लिए फ़र्ज़ी दावों और भ्रामक पोस्टों का सहारा लेना एक ख़तरनाक चलन बन चुका है। ‘हॉटलिंक न्यूज़’ और ‘खबरों की खबर’ के संपादक के रूप में, हमारा यह मानना है कि सनसनीखेज ग्राफिक्स और तोड़-मरोड़कर पेश किए गए तथ्यों के ज़रिए जनता की भावनाओं से खिलवाड़ किया जा रहा है। ये अफ़वाहें न केवल ऐतिहासिक तथ्यों को विकृत करती हैं, बल्कि समाज मेंRead More 2014 से 2026 तक भारत में कितने आतंकी हमले हुए? मोदी सरकार के दावों की तथ्य-जांचक्या 2014 के बाद भारत में कितने आतंकी हमले हुए? पूरी फैक्ट चेक भारत में कितने आतंकी हमले हुए? : देश में माहौल फैलाया गया है, मोदी ही हैं जिनकी वजह से आज देश में कोई आतंकी हमला नहीं होता। क्योंकि आज देश सुरक्षित हाथों में है।” विपक्षी दलों का जवाब है : मोदी और अडानी को देश मानने वालों, पता है अभी 23 नवंबर को ही जम्मू-कश्मीर के राजौरी में हमारे 5 जवान शहीद हुए हैं। 13 सितंबर को ही आतंकी हमले में हमारे मेजर, कर्नल और डीएसपी शहीदRead More Fact Check : ‘बंच ऑफ थॉट्स’ (Bunch of Thoughts) से जुड़े वायरल पन्ने की सच्चाईFact Check : ‘बंच ऑफ थॉट्स’ (Bunch of Thoughts) सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के द्वितीय सरसंघचालक एम. एस. गोलवलकर (गुरुजी) द्वारा लिखित पुस्तक ‘बंच ऑफ थॉट्स’ (Bunch of Thoughts) के एक कथित पन्ने की तस्वीर वायरल हो रही है। इस पन्ने में संविधान, सरकार, शिक्षा के भगवाकरण और OBC, SC तथा ST समुदायों से जुड़ी कई आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं। वायरल दावा: वायरल फोटो में दावा किया जा रहा है कि एम. एस. गोलवलकर ने अपनी पुस्तक ‘बंच ऑफ थॉट्स’ में निम्नलिखित बिंदु लिखे हैं:Read More FACT CHECK: क्या सच्चर कमेटी (Sachar Committee) ने ‘एक मुस्लिम के 2 वोट’ और 40% आरक्षण की सिफारिश की थी? जानिए वायरल मैसेज का पूरा सचनई दिल्ली: क्या सच्चर कमेटी (Sachar Committee) ने ‘एक मुस्लिम के 2 वोट’ और 40% आरक्षण की सिफारिश की थी? : सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स (WhatsApp, Facebook, X) पर यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान गठित ‘सच्चर समिति’ (Sachar Committee) को लेकर एक लंबा संदेश तेजी से वायरल हो रहा है। इस संदेश में दावा किया जा रहा है कि सच्चर समिति ने मुसलमानों के लिए ‘एक वोट को दो वोटों के बराबर गिनने’, लोकसभा-विधानसभाओं में भारी आरक्षण देने, सरकारी बैंक लोन का आधा हिस्सा सरकार द्वारा चुकाने और नकद राशिRead Moreसबूत नंबर तीन
तीसरा: अभी कुछ दिन पहले की खबर है, इसकी एग्जैक्ट ऑपोजिट चीज़ उत्तर प्रदेश में हुई। करीब 14 लाख वोटर्स के नाम ऐड किए गए वोटिंग लिस्ट पर। और यह मिस्टीरियसली वोटिंग लिस्ट पर आ गए। ‘रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ की खबर है। अचानक से जो लोग वोटिंग लिस्ट पर आ गए, उनके क्या नाम थे, यह दोबारा से नहीं बताया गया।
तो ना जो नाम वोटिंग लिस्ट पर ऐड किए जा रहे हैं उनके नाम बताए जा रहे हैं, ना वो बताया जा रहा है कि जिनके नाम हटाए जा रहे हैं। और ऐसा ही एक केस हुआ गोवा में। गोवा में करीब 100 कुछ वोटर्स थे, EROs उनका नाम वोटिंग लिस्ट पर ऐड करना चाहते थे, लेकिन सॉफ्टवेयर में कोई तरीका ही नहीं था उनको ऐड करने का।
तो वोटिंग लिस्ट पर नाम भी नहीं ऐड करने दे रहे, अपनी मर्जी से नाम ऐड किए जा रहे हो, अपनी मर्जी से नाम हटाए जा रहे हो, सब कुछ अपनी मर्जी से चल रहा है।”
“ना रिजीम चेंज, ना सोरोस की फंडिंग!” – ध्रुव राठी ने आलोचकों को दिया करारा जवाब, पीएम मोदी और चुनाव आयोग से पूछे 3 तीखे सवाल!
“खुद के पैसों से आया हूँ!” – सरकार बदलने के आरोपों पर ध्रुव राठी का बड़ा खुलासा, ‘वोट चोरी’ पर इलेक्शन कमीशन को घेरा!
“ना सरकार बदलना मकसद, ना किसी की फंडिंग”: ध्रुव राठी ने अफवाहों को नकारा, चुनाव आयोग और पीएम मोदी से मांगे 3 बड़े सवालों के जवाब
जनसभा को संबोधित करते हुए प्रमुख यूट्यूबर और विश्लेषक ध्रुव राठी ने अपने आलोचकों को करारा जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य राजनीति करना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना है। राइट-विंग और सत्ताधारी पार्टी के आरोपों का खंडन करते हुए राठी ने कहा:
राठी ने आगे चुटकी लेते हुए कहा, “नरेंद्र मोदी सोच रहे होंगे कि इस सज्जन को क्या तकलीफ है भाई?” उन्होंने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष चुनाव का मुद्दा किसी एक पार्टी का नहीं है। “बीजेपी को वोट करो चाहे आप कांग्रेस को वोट करो, यह एक ऐसा मुद्दा है जो हर देशवासी को कंसर्न करता है।” इसके बाद उन्होंने चुनाव आयोग (ECI) और शीर्ष नेतृत्व के सामने वोटर लिस्ट में अनियमितताओं से जुड़े 3 गंभीर सबूत पेश किए:
1. पश्चिम बंगाल: “चुनाव के बाद वापस आए 70,000 मरे हुए वोटर्स?”
राठी ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि चुनाव से ठीक पहले (70000 मरे हुए वोटर्स ) 70,000 से अधिक नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए, लेकिन नतीजे आते ही उन्हें वापस जोड़ दिया गया।
“रियल जेन्युइन वोटर्स पहले वोटिंग लिस्ट पर थे, बाद में भी थे, लेकिन बस वोटिंग के समय गायब थे! ‘मुर्दा या घुसपैठिये’ बताने वाले जवाब दें कि ये लोग बाद में वापस वोटर लिस्ट में कैसे आ गए?”
2. बिहार: 65 लाख नाम गायब, सुप्रीम कोर्ट के दबाव में आई जानकारी
बिहार में 65 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने पर सवाल उठाते हुए राठी ने कहा कि चुनाव आयोग ने यह जानकारी तब तक छुपाए रखी जब तक सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं आया।
“ज्ञानेश कुमार ने यह चीज़ छुपा कर रखी, अंटिल सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर नहीं आ गया कि इन नामों को पब्लिक करो… कोई ट्रांसपेरेंसी नहीं है—ज़ीरो ट्रांसपेरेंसी, ज़ीरो अकाउंटेबिलिटी।”
3. उत्तर प्रदेश और गोवा: रहस्यमयी जोड़-तोड़ और तकनीकी विफलता
तीसरे सबूत में उन्होंने उत्तर प्रदेश में अचानक 14 लाख नए नाम जोड़े जाने और गोवा में सॉफ्टवेयर की खामियों के कारण जायज मतदाताओं के नाम न जुड़ पाने का मुद्दा उठाया।
भाषण के समापन पर राठी ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा, “ना जो नाम ऐड किए जा रहे हैं उनके नाम बताए जा रहे हैं, ना हटाए जाने वाले नामों का खुलासा हो रहा है… सब कुछ अपनी मर्जी से चल रहा है।”
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