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एल नीनो (El Niño) इफेक्ट : 15 October तक बदलता रहेगा मानसून का मिज़ाज!

हॉटलिंक न्यूज (Hotlink News) के लिए विशेष इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

एल नीनो (El Niño) इफेक्ट क्या है? मौसम के मिजाज और ग्लोबल क्लाइमेट पर इसका असर

देशभर में मौसम एक बार फिर करवट ले रहा है—कहाँ पहाड़ों पर बारिश की हलचल है, तो कहीं अक्टूबर के मध्य में भी मानसून की विदाई और नए पश्चिमी विक्षोभ का असर देखा जा रहा है। मौसम में हो रहे इन बड़े बदलावों के पीछे ग्लोबल वेदर पैटर्न, खासकर ‘एल नीनो’ (El Niño) की सक्रियता एक बड़ा कारण बनी हुई है।

आइए गहराई से समझते हैं कि आखिर एल नीनो इफेक्ट क्या है और यह हमारे मौसम को कैसे प्रभावित करता है:

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1. एल नीनो (El Niño) क्या है?

‘एल नीनो’ एक प्राकृतिक जलवायु चक्र (Climate Pattern) है, जिसका संबंध प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) के तापमान से है। सरल शब्दों में कहें तो जब भूमध्य रेखा के पास मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, तो इस स्थिति को एल नीनो कहा जाता है।

स्पेनिश भाषा में ‘एल नीनो’ का मतलब ‘छोटा लड़का’ या ‘क्राइस्ट चाइल्ड’ होता है, क्योंकि दक्षिण अमेरिका के पेरू तट के पास यह घटना अक्सर क्रिसमस के आसपास महसूस की जाती थी।

2. यह काम कैसे करता है? (वैज्ञानिक प्रक्रिया)

  • समुद्री तापमान में वृद्धि: सामान्य दिनों में पूर्वी हवाएं (Trade Winds) गर्म पानी को एशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ धकेलती हैं, जिससे दक्षिण अमेरिका के तट पर ठंडा पानी ऊपर आता है।
  • हवाओं का कमजोर होना: एल नीनो के दौरान ये पूर्वी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं या उलट जाती हैं। इसके चलते गर्म पानी वापस दक्षिण अमेरिकी तट की ओर बहने लगता है।
  • वातावरण पर असर: महासागर का तापमान बढ़ने से वैश्विक स्तर पर हवा का दबाव (Pressure Gradient) बदल जाता है, जिससे दुनिया भर में बादलों के बनने और बारिश के पैटर्न में भारी बदलाव आ जाता है।

3. भारत और दुनिया के मौसम पर इसका क्या असर पड़ता है?

एल नीनो का प्रभाव पूरी दुनिया में अलग-अलग तरीकों से दिखाई देता है:

  • कमजोर मानसून या सूखा: भारत के संदर्भ में पारंपरिक रूप से एल नीनो को मानसूनी हवाओं के लिए कमजोर कड़ी माना जाता रहा है। इसके प्रभाव से कई बार भारत में सामान्य से कम बारिश या सूखे के हालात बनते हैं। हालांकि, अन्य क्लाइमेट ड्राइवर्स (जैसे इंडियन ओशियन डिपोल – IOD) इसके असर को संतुलित भी करते हैं।
  • असामान्य मौसम और चक्रवात: वर्तमान में सक्रिय एल नीनो के कारण वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इसकी वजह से दुनिया के एक हिस्से में भयंकर सूखा और गर्मी पड़ती है, तो दूसरे हिस्से में अचानक मूसलाधार बारिश, बाढ़ या चक्रवाती तूफानों का खतरा बढ़ जाता है।

4. वर्तमान परिदृश्य (अक्टूबर 2026 अपडेट)

वैश्विक मौसम एजेंसियों (जैसे WMO और NOAA) के अनुसार, यह शक्तिशाली एल नीनो चक्र लगातार गहरा रहा है और इसके आगामी सर्दियों (फरवरी 2027) तक बने रहने की पूरी संभावना है। यही वजह है कि मानसून की विदाई के समय भी भारत के कई हिस्सों में अचानक मौसम में बदलाव, बेमौसम बारिश और पहाड़ों से लेकर मैदानों तक अजीबोगरीब मौसमी हलचल देखने को मिल रही है।

यह रिपोर्ट हॉटलिंक न्यूज (Hotlink News) के विशेष जलवायु अध्ययन कक्ष द्वारा तैयार की गई है।






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